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मिडिल ईस्ट जंग के बीच पाकिस्तान का बड़ा बयान: इशाक डार की टिप्पणी से भड़क सकता है ईरान, ट्रंप जैसी भाषा पर विवाद

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मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का बयान अब नए विवाद की वजह बनता दिख रहा है। ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है, डार ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष रूप से शांति वार्ता चल रही है और इसमें पाकिस्तान अहम भूमिका निभा रहा है। हालांकि उनके इस बयान को लेकर सवाल उठने लगे हैं और माना जा रहा है कि इससे ईरान नाराज हो सकता है।

दरअसल, इशाक डार ने कहा कि अमेरिका ने शांति समझौते के लिए 15 बिंदुओं का प्रस्ताव ईरान को भेजा है, जिस पर तेहरान विचार कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में पाकिस्तान के अलावा तुर्किए और मिस्र जैसे देश भी मध्यस्थता कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी भी बातचीत से इनकार किया है और साफ कहा है कि वह अपने शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इशाक डार का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति के अनुरूप नजर आता है, जो लगातार ईरान पर दबाव बनाते हुए शांति समझौते की बात कर रहे हैं। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भी संकेत दिया है कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है। ऐसे में पाकिस्तान का इस तरह खुलकर अमेरिका की शर्तों का जिक्र करना ईरान को उकसाने जैसा माना जा रहा है।

यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब पाकिस्तान खुद को इस युद्ध में एक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। हालांकि, ईरान की तरफ से मिले हालिया संकेत बताते हैं कि वह किसी बाहरी दबाव में आने को तैयार नहीं है और सैन्य मोर्चे पर अपनी रणनीति जारी रखेगा।

इस बीच एक और घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने एक पाकिस्तानी जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से रोक दिया, यह कहते हुए कि उसके पास आवश्यक अनुमति नहीं थी। इस कदम को कई विश्लेषक पाकिस्तान के बयानों के प्रति ईरान की नाराजगी के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

गौरतलब है कि 2026 में शुरू हुए इस संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कई देशों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए। अब कई देश कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।

कुल मिलाकर, इशाक डार का बयान ऐसे समय में आया है जब हर शब्द और हर संकेत का बड़ा असर पड़ सकता है। अगर इस तरह के बयानबाजी जारी रही, तो न सिर्फ कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं, बल्कि ईरान और पाकिस्तान के संबंधों में भी तनाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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