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पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर किया बड़ा खुलासा, बोले– “हम मुसलमान हैं और हमने डर का सामना किया”

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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक सार्वजनिक सभा में किए अपने हालिया बयान में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर ऐसा खुलासा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दी है। मई 2025 में भारत की सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में चार दिनों तक चले तनाव की बात करते हुए जरदारी ने खुद स्वीकार किया कि उस समय पाकिस्तानी नेतृत्व को गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उन्हें सुरक्षा के लिए बंकर में छिपने की सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि उनके सेना सचिव ने उन्हें कहा कि “सर, युद्ध शुरू हो गया है, बंकर में चलें”, लेकिन उन्होंने इसके बावजूद मैदान छोड़ने से इनकार किया। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि “अगर शहादत आनी है तो यहीं आएगी, नेता बंकर में नहीं मरते” – जैसी भावनात्मक बात कही

इसके साथ ही जरदारी ने अपने भाषण को सांप्रदायिक रंग में ढालते हुए ‘हम मुसलमान हैं’ जैसे बयान भी दिए, जिससे ये संदेश गया कि पाकिस्तान खुद को कट्टर इस्लामी पहचान के साथ देखता है। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री और भारतीय सेनाओं के खिलाफ भी कृत्यों का उल्लेख करते हुए यह दावा किया कि अगर युद्धविराम नहीं होता तो पाकिस्तान भारत के विमानों को भी मार गिरा सकता था, और वह भारत के विमानवाहक पोत ‘INS विक्रांत’ को भी निशाना बना सकते थे — हालांकि उन्होंने उसका नाम गलत बोल दिया था।

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास है, जो पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की स्थिति को मजबूत दिखाने के लिए दिए गए हैं, जबकि वास्तविकता में भारत की सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तानी वायुसेना के ठिकानों पर काफी प्रभाव डाला था और पाकिस्तान को अपनी रक्षा में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।

जरदारी के बयान में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान के अन्य वरिष्ठ नेता, जैसे उप प्रधानमंत्री इशाक डार, ने भी अब लंबे समय तक नकारे जाने वाले तथ्यों को स्वीकार किया है और माना है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।

आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पहले किए गए भड़काऊ भाषण का हवाला देते हुए, जिसमें उन्होंने हिंदू और मुस्लिम के बीच सांप्रदायिक भेद को रेखांकित किया था, जरदारी के बयान को उसी बयानबाजी की निरंतरता माना जा रहा है। मुनीर ने पहले कहा था कि पाकिस्तान और भारत दो अलग-अलग सांस्कृतिक तथा धार्मिक राष्ट्र हैं, और इसी दो-राष्ट्र सिद्धांत की बात को उन्होंने दोहराया था।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से जानी गई यह सैन्य कार्रवाई भारत के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू की गई थी, और इसने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था। पाकिस्तान में इसके नतीजे इतने गंभीर रहे कि देश के उच्च रक्षा-राजनीतिक स्तर पर भी भय का माहौल पैदा हुआ और सुरक्षा उपायों को कड़ा किया गया।

इन घटनाओं के प्रकाश में, जरदारी का बयान न केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है बल्कि भू-राजनीतिक संघर्ष, सैन्य प्रतिस्पर्धा, और सांप्रदायिक राजनीति के बीच जटिल संतुलन को भी उजागर करता है, जो दक्षिण एशिया में ऐतिहासिक रूप से जारी है।

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