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सीरिया के साथ खड़ा हुआ पाकिस्तान, गोलान हाइट्स पर इजरायल को खुली चुनौती

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पाकिस्तान और सीरिया के रिश्तों में करीब 2 दशक बाद एक बार फिर नई गर्माहट दिखाई दे रही है। सीरिया के विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी ने 19 साल बाद पाकिस्तान का दौरा किया और इस दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री एवं उपप्रधानमंत्री इशाक डार के साथ अहम बातचीत की। दोनों देशों के बीच हुई बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, फिलिस्तीन, गोलान हाइट्स, अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। ऐसे समय में हुई यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है, जब पश्चिम एशिया में इजरायल, सीरिया और तुर्किये के बीच तनाव बढ़ा हुआ है।

बैठक में सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक गोलान हाइट्स का रहा। गोलान हाइट्स सीरिया अपना क्षेत्र मानता है, जबकि 1967 के युद्ध के बाद से इस इलाके पर इजरायल का नियंत्रण है। इजरायल ने 1981 में गोलान हाइट्स को अपने साथ मिलाने का ऐलान किया था, लेकिन इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली। पाकिस्तान ने बैठक के बाद सीरिया की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन को दोहराया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी गोलान हाइट्स को लेकर सीरिया के रुख का समर्थन किया।

पाकिस्तान का यह रुख ऐसे वक्त में सामने आया है जब सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियां लगातार चर्चा में हैं। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद इजरायल ने सीरिया के कई इलाकों में सैन्य कार्रवाई की है। इजरायल का कहना है कि उसकी कार्रवाइयों का उद्देश्य अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना और सीरिया में ऐसी सैन्य क्षमताओं को रोकना है जिन्हें वह अपने लिए खतरा मानता है। हाल के दिनों में सीरिया में तुर्किये की बढ़ती सैन्य भूमिका को लेकर भी इजरायल और तुर्किये के बीच तनाव बढ़ा है।

इसी बदलते क्षेत्रीय समीकरण के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुआ नया रक्षा समझौता भी महत्वपूर्ण हो जाता है। 7 अगस्त 2026 को इन 3 देशों ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा। सीरिया के विदेश मंत्री ने इस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते का स्वागत किया और क्षेत्रीय शांति के प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका की भी तारीफ की।

सीरिया और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों देश अपने रिश्तों को केवल राजनीतिक समर्थन तक सीमित रखने के बजाय कई क्षेत्रों में विस्तार देना चाहते हैं। शहबाज शरीफ ने सीरिया के साथ राजनीतिक और रक्षा सहयोग के अलावा व्यापार, निवेश, शिक्षा और मानव संसाधन के क्षेत्र में भी संबंध मजबूत करने की बात कही। उन्होंने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा को पाकिस्तान आने का निमंत्रण भी दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर इजरायल-पाकिस्तान संबंधों पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान और इजरायल के बीच पहले से ही औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और फिलिस्तीन के मुद्दे पर इस्लामाबाद लगातार फिलिस्तीनी पक्ष का समर्थन करता रहा है। अब गोलान हाइट्स जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सीरिया के पक्ष में खुलकर समर्थन जताने और तुर्किये-सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने से पश्चिम एशिया की शक्ति राजनीति में पाकिस्तान की भूमिका पहले से ज्यादा दिखाई दे सकती है।

दूसरी ओर, सीरिया के लिए भी पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंध रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। वर्षों के युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता के बाद सीरिया अपनी अर्थव्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इसी क्रम में वह तुर्किये, अरब देशों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ अपने संबंधों का विस्तार कर रहा है। पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी भी इसी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा सकती है।

हालांकि पाकिस्तान का सीरिया के गोलान हाइट्स संबंधी दावे का समर्थन करना अपने आप में इजरायल के साथ सीधे सैन्य टकराव का संकेत नहीं है। लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों में जब तुर्किये और इजरायल के बीच सीरिया को लेकर तनाव बढ़ रहा है और पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा तुर्किये के बीच नया रक्षा गठजोड़ सामने आ चुका है, तब इस्लामाबाद का दमिश्क के पक्ष में खुलकर खड़ा होना पश्चिम एशिया के बदलते शक्ति समीकरण का महत्वपूर्ण संकेत जरूर है।

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