फिलिस्तीन की विदेश मंत्री डॉ. वर्सेन अगाबेकियन शाहीन ने अपने भारत दौरे के दौरान एक ताकतवर और स्पष्ट बयान दिया है, जिसमें उन्होंने गाजा संघर्ष और शांति प्रक्रिया को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, तथा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अपने विश्वास और अपेक्षाओं को स्पष्ट किया है। शाहीन के अनुसार, फिलिस्तीनी नेतृत्व ट्रंप के शांति प्रयासों में भरोसा रखता है लेकिन नेतन्याहू की नीतियों पर उनकी नजर यथास्थिति को बदलने में निराशाजनक रही है। वहीं, उन्होंने मोदी को “दोस्त” करार देते हुए भारत की भूमिका को संघर्ष समाधान में महत्वपूर्ण बताया है।
) ट्रंप और नेतन्याहू पर फिलिस्तीनी नजरें: शाहीन ने कहा कि फिलिस्तीन को उम्मीद है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित “Gaza Peace Board” जैसी पहलों से गाजा में शांति की दिशा में प्रगति हो सकती है। उनका कहना था कि नेतन्याहू जब तक इजरायल के प्रधानमंत्री हैं, तब तक जल्द समाधान की उम्मीद कम है, क्योंकि नेतन्याहू ने बार-बार संकेत दिए हैं कि वह फिलिस्तीनी इलाकों पर अपना प्रभाव और कब्ज़ा बढ़ाने की योजना रखते हैं, विशेष रूप से वेस्ट बैंक पर। इसलिए फिलिस्तीन की नजर ट्रंप के शांति प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय दबाव पर अधिक केंद्रित है।
) भारत से उम्मीदें और मोदी की भूमिका: डॉ. शाहीन ने भारत से विशेष उम्मीदें जताईं क्योंकि भारत ने 1947 से ही फिलिस्तीन का समर्थन किया है और आज भी भारत के इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसा संतुलित दृष्टिकोण रखने वाला देश मध्यस्थता और संवाद के लिए बेहतर स्थितियों का निर्माण कर सकता है। उनका मानना है कि भारत किसी तीसरे पक्ष के बजाय एक “मित्र” के रूप में दोनों पक्षों से बात कर सकता है और शांति वार्ता के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
) शांति प्रयासों की चुनौतियाँ: फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गाजा संकट केवल युद्ध-समाप्ति का मुद्दा नहीं है बल्कि इलाके का पुनर्निर्माण और मानवीय स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गाजा की बुनियादी संरचना का विशाल हिस्सा नष्ट हो चुका है और वहां के लोगों की ज़रूरतें अभी भी बहुत अधिक हैं। इस कठिनाई को देखते हुए, वह चाहती हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से भारत, निर्माण कार्यों और मानवीय सहायता में भूमिका निभाए।
) वैश्विक शांति प्रयासों पर टिप्पणी: शाहीन ने जोर देकर कहा कि युद्ध का अंत और स्थायी शांति तभी संभव है जब अंतरराष्ट्रीय कानून और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ स्थानीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक शांति की दिशा में एक परीक्षात्मक मुद्दा है, जिसमें सभी पक्षों को शामिल होना चाहिए।
) कूटनीति और भविष्य के संकेत: फिलिस्तीनी विदेश मंत्री का भारत दौरा ऐसे समय में किया गया है जब कई वैश्विक नेता शांति और समाधान के लिए नए ढांचे तलाश रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और अन्य देशों द्वारा भी शांति प्रस्तावों और मध्यस्थता की कोशिशों पर चर्चा जारी है। फिलिस्तीनी दृष्टिकोण के अनुसार, अगर भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र संतुलित, न्यायोचित और सक्रिय भूमिका निभाए, तो संघर्ष की दीर्घावधि समस्याओं को सुलझाने में मदद मिल सकती है।
इस बयान और दौरे से यह भी संकेत मिलता है कि फिलिस्तीन भारत को एक अहम कूटनीतिक और मानवीय भागीदार के रूप में देखता है, जो मध्यपूर्व में स्थायी शांति की दिशा में समर्थ भूमिका निभा सकता है। अगर भारत इस भरोसे को व्यवहार में बदलता है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
