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पैराग्वे ने रचा बड़ा उलटफेर, पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराकर विश्व कप में किया सनसनीखेज धमाका

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फीफा विश्व कप 2026 में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब पैराग्वे ने चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय तक मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ, जिसके बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। रोमांचक शूटआउट में पैराग्वे ने 4-3 से जीत दर्ज करते हुए विश्व फुटबॉल जगत को चौंका दिया और नॉकआउट चरण में अपनी सबसे यादगार जीतों में से एक हासिल की।

मैच की शुरुआत से ही जर्मनी को प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पैराग्वे ने अनुशासित खेल और मजबूत रक्षात्मक रणनीति के दम पर मुकाबले को पूरी तरह संतुलित बनाए रखा। पहले हाफ में स्टार खिलाड़ी जूलियो एनसिसो ने गोल दागकर पैराग्वे को बढ़त दिलाई, जिससे जर्मन टीम दबाव में आ गई। हालांकि बाद में काई हैवर्ट्ज़ ने गोल कर जर्मनी को बराबरी दिला दी और मुकाबला अतिरिक्त समय तक पहुंच गया। इसके बावजूद जर्मन टीम कई अवसरों का फायदा उठाने में असफल रही।

अतिरिक्त समय के दौरान जर्मनी को जीत के बेहद करीब माना जा रहा था। टीम ने एक गोल भी किया, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की समीक्षा के बाद उसे रद्द कर दिया गया। इस फैसले ने मैच का रुख बदल दिया और जर्मन खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके प्रशंसकों को भी बड़ा झटका लगा। VAR के इस निर्णय पर बाद में काफी बहस देखने को मिली और कई फुटबॉल विशेषज्ञों ने इसे विवादास्पद बताया।

पेनल्टी शूटआउट में पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल हीरो बनकर उभरे। उन्होंने जर्मनी के महत्वपूर्ण प्रयासों को रोककर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। जर्मनी की ओर से कुछ प्रमुख खिलाड़ी दबाव में चूक गए, जबकि पैराग्वे के खिलाड़ियों ने संयम बनाए रखा। अंततः जोस कैनाले ने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर अपनी टीम की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित कर दी। यह विश्व कप इतिहास में पहली बार माना जा रहा है जब जर्मनी किसी विश्व कप पेनल्टी शूटआउट में पराजित हुआ है।

इस हार के बाद जर्मनी की टीम और कोच जूलियन नागेल्समैन पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कुछ बड़े टूर्नामेंटों में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के कारण टीम की रणनीति और चयन प्रक्रिया को लेकर आलोचना तेज हो गई है। कप्तान जोशुआ किमिख ने भी स्वीकार किया कि टीम पूरे टूर्नामेंट में अपने स्तर के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी। दूसरी ओर, पैराग्वे की इस जीत को उसके संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की बड़ी मिसाल माना जा रहा है।

पैराग्वे की यह जीत विश्व कप 2026 के सबसे बड़े उलटफेरों में गिनी जा रही है। जिस टीम को मुकाबले से पहले कमजोर माना जा रहा था, उसने विश्व फुटबॉल की दिग्गज टीम को हराकर यह साबित कर दिया कि नॉकआउट चरण में नाम नहीं बल्कि प्रदर्शन मायने रखता है। अब पैराग्वे की नजरें अगले दौर पर टिकी हैं, जबकि जर्मनी को एक बार फिर विश्व कप में निराशाजनक अभियान के बाद आत्ममंथन करना होगा।

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