नई दिल्ली में मंगलवार को संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नारेबाजी देखने को मिली। झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी पर सवाल उठाए, जबकि विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में जवाब देने की मांग कर रहे थे।
संसद भवन के मकर द्वार के पास NDA सांसदों ने प्रदर्शन करते हुए राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए। सांसदों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं, जिनके जरिए विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया। सत्ता पक्ष के सांसदों का कहना था कि राहुल गांधी छात्रों के अधिकारों की बात कर रहे हैं, लेकिन झारखंड में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के मामले में उनकी भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।
दरअसल, झारखंड में JPSC और JSSC समेत भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। 10 अगस्त को रांची में छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनाव की स्थिति बनी और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन और बल प्रयोग का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को गलत बताते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग की थी।
राहुल गांधी के इसी बयान को लेकर सत्ता पक्ष ने उन पर निशाना साधा है। BJP सांसदों ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस झारखंड की सरकार में सहयोगी है तो वहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर राहुल गांधी क्या कदम उठा रहे हैं। सत्ता पक्ष की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि राहुल गांधी संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रहे हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष को संसद में बहस के लिए आगे आना चाहिए और केवल संसद के बाहर प्रदर्शन करने के बजाय सदन के भीतर अपनी बात रखनी चाहिए।
दूसरी तरफ विपक्षी सांसद दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करें। विपक्षी दलों का कहना है कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग के आरोप गंभीर हैं और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर संसद में गतिरोध बना हुआ है।
प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के सांसद एक-दूसरे के सामने आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षाकर्मियों को दोनों पक्षों के बीच घेरा बनाना पड़ा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस तरह का आमना-सामना संसद के भीतर चल रहे राजनीतिक तनाव को भी दिखाता है। झारखंड के छात्रों का मुद्दा अब संसद की राजनीति में भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
इस पूरे विवाद में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के सांसदों का प्रदर्शन करना असामान्य स्थिति है और विपक्ष के दबाव के कारण सत्ता पक्ष को सड़क पर उतरना पड़ा है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष संसद को लगातार बाधित कर रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है। इस तरह दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज में बाधा डालने का आरोप लगा रहे हैं।
फिलहाल झारखंड में छात्रों का आंदोलन, दिल्ली में प्रदर्शन और संसद के भीतर सत्ता पक्ष-विपक्ष की टकराहट एक-दूसरे से जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होती है तो छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और झारखंड की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद पर दोनों पक्षों का रुख और स्पष्ट हो सकता है। वहीं, छात्रों की मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कदम उठाना भी इस पूरे विवाद को शांत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
