असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले सियासी माहौल और भी गरमाता जा रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर असम पुलिस की टीम पहुंचने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक पुलिस उनसे पूछताछ के लिए पहुंची, और इस दौरान दिल्ली पुलिस की टीम भी उनके साथ मौजूद रही। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो रहा है।
दरअसल, पूरा विवाद उस बयान से शुरू हुआ जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर गंभीर सवाल उठाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक नहीं बल्कि तीन पासपोर्ट हैं और इसको लेकर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई सवाल खड़े किए थे। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या यह कानून के खिलाफ नहीं है और क्या इस मामले की जांच होनी चाहिए।
इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे “राजनीतिक रूप से प्रेरित” और “झूठा” बताया। इसके बाद उनकी पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके खिलाफ झूठे और भ्रामक दावे किए गए हैं।
एफआईआर दर्ज होने के ठीक बाद पुलिस की यह कार्रवाई सामने आई, जिससे साफ है कि मामला अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी मोड़ ले चुका है। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद मतदाताओं को प्रभावित करने और राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री सरमा ने कांग्रेस पर और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि खेड़ा द्वारा उठाए गए मुद्दों के पीछे विदेशी, खासकर पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया स्रोतों का हाथ हो सकता है। हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को भी खारिज किया है और इसे भाजपा की “ध्यान भटकाने की राजनीति” बताया है।
कुल मिलाकर, असम चुनाव से पहले यह विवाद अब एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है, जहां एक तरफ आरोपों की बौछार है तो दूसरी तरफ कानूनी कार्रवाई। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है और क्या यह विवाद और भी गहराता है।
