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पेट्रोल-डीजल पर महंगाई की मार, ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत में 3 रुपये प्रति लीटर बढ़े दाम

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर अब सीधे भारतीय आम जनता की जेब पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी हैं, जिससे देशभर में परिवहन, कृषि और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।

दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य तनाव के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइन माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट गहरा गया है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती है। हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे घरेलू ईंधन कीमतों पर असर डालता है।

नई कीमतों के बाद दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता समेत कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की दरें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तथा तेल आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। कुछ आर्थिक जानकारों ने चेतावनी दी है कि इससे महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ेगा और खाद्य पदार्थों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक हर क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।

इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। उन्होंने गैर-जरूरी यात्रा कम करने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और ईंधन की खपत घटाने जैसे कदम अपनाने का सुझाव दिया है। सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में तेल की सप्लाई को लेकर कोई संकट नहीं है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी जरूरी है। केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए भी कई आर्थिक कदमों पर विचार कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं तो यह संकट 1970 के दशक के ऊर्जा संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। इससे सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। तेल की कीमतों में उछाल का असर हवाई किराए, माल ढुलाई, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भी पड़ने लगा है।

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