प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले उपहारों और स्मृति चिह्नों की 2025 में हुई ई-नीलामी से केंद्र सरकार को 1.89 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। सरकार ने बताया कि इन नीलामियों से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल सार्वजनिक हित से जुड़े कार्यों और नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए किया जाता है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री को आधिकारिक कार्यक्रमों और विभिन्न अवसरों पर मिले उपहारों को नीलामी के लिए रखा जाता है। इनमें अलग-अलग तरह की कलाकृतियां, स्मृति चिह्न और अन्य वस्तुएं शामिल होती हैं। इच्छुक लोग इन वस्तुओं के लिए ऑनलाइन बोली लगाते हैं और नीलामी से मिलने वाली राशि सरकारी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाती है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में हुई नीलामी से करीब 3.1 करोड़ रुपये मिले थे। 2022 में यह राशि 3.6 करोड़ रुपये रही, जबकि 2023 में नीलामी से 15.8 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 2024 में भी करीब 11.6 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई थी। इसके बाद 2025 की नीलामी से 1.89 करोड़ रुपये मिले।
इन नीलामियों की खास बात यह है कि प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से मिले उपहारों को अपने पास रखने के बजाय उन्हें सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इससे लोगों को प्रधानमंत्री को मिले खास स्मृति चिह्न खरीदने का अवसर मिलता है और उससे प्राप्त धन का इस्तेमाल सामाजिक तथा जनहित के कार्यों में किया जाता है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इन नीलामियों से प्राप्त रकम नमामि गंगे कार्यक्रम जैसे कार्यों में लगाई जाती है। इस पहल का उद्देश्य गंगा नदी की स्वच्छता और संरक्षण से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देना है। इस तरह प्रधानमंत्री को मिले उपहारों की नीलामी से प्राप्त धन को सार्वजनिक उपयोग में लाने की व्यवस्था की गई है।
2025 की नीलामी से 1.89 करोड़ रुपये जुटने की जानकारी सामने आने के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री को मिले उपहारों की ई-नीलामी चर्चा में है। इससे पहले भी कई चर्चित उपहार और स्मृति चिह्न नीलामी के दौरान लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए प्राप्त धन को जनहित के कामों में लगाया जाता है।
