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पश्चिम एशिया संकट के बीच पीएम मोदी की कूटनीतिक पहल: ओमान के सुल्तान और कुवैत के क्राउन प्रिंस से गंभीर बातचीत

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विश्व स्तर पर पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात के बीच भारत ने अपने कूटनीतिक संपर्कों को और भी मजबूती से आगे बढ़ाया है। प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फोन पर ओमान के सुल्तान Sultan Haitham bin Tarik और कुवैत के क्राउन प्रिंस Sheikh Sabah Al-Khaled Al-Hamad Al-Mubarak Al-Sabah से विस्तृत बातचीत की, जिसमें उन्होंने المنطقة में बढ़ते संघर्ष और ख़तरों पर गहरी चिंता व्यक्त की। इन चर्चाओं में खास तौर पर क्षेत्र में सुरक्षा, शांति-स्थिरता के प्रयास और भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा की गई।

पीएम मोदी और इन खाड़ी नेताओं के बीच यह संपर्क ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने कई देशों को प्रभावित किया है, मिसाइलों और ड्रोन हमलों की खबरें फैल रही हैं और ख़ासकर यूएस-इज़राइल के ईरान पर हमलों तथा उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया ने स्थिति को बेहद अस्थिर बना दिया है। इस दौरान कई राज्य के नागरिकों सहित भारतीयों की सुरक्षा भी जोखिम में आ सकती है, जिसे लेकर मोदी ने अपनी बातचीत में विशेष ज़ोर दिया।

ओमान और कुवैत दोनों ही देश भारत के लिए समुद्री और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदार हैं और इनके साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना न केवल द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती के लिए ज़रूरी है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में रह रहे करोड़ों भारतीयों की भलाई के लिए भी अहम है। मोदी ने अपने फोन कॉल में दोनों नेताओं के साथ हमले, तनाव और सुरक्षा चुनौतियों पर विचार साझा किए, वहीं यह भी बताया कि भारत इस समय सभी भारतीयों की सुरक्षित निकासी और सहायता के प्रति प्रतिबद्ध है।

यह बातचीत भारत की कूटनीति की सक्रियता और विदेश नीति के संतुलन को प्रदर्शित करती है, जिसमें भारत एक शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है और लगातार क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क में है ताकि संघर्ष के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके। इससे पहले मोदी ने बहरीन, सऊदी अरब और कतर के नेताओं से भी इसी विषय पर संवाद किया था, जिसमें शांति स्थापित करने और संघर्ष को कम करने के तरीकों पर चर्चा हुई थी।

मोदी की ये कई दौरों वाली बातचीतें यह संकेत देती हैं कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, और उसने स्पष्ट किया है कि संघर्ष के प्रसार को रोकने के लिए राजनयिक प्रयास ज़रूरी हैं। इन कदमों से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत शांति और कूटनीतिक समाधान की दिशा में अग्रसर है और विवाद के समाधान के लिए संवाद का चयन करता है।

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