प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम के साथ करीब 5 घंटे तक संवाद किया। यह बैठक पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम की घोषणा के बाद पहली बड़ी बैठक थी। प्रधानमंत्री शाम के समय पार्टी मुख्यालय पहुंचे और नई टीम में शामिल पदाधिकारियों से व्यक्तिगत बातचीत की। इस दौरान उन्होंने नेताओं के करियर, उनके राजनीतिक अनुभव और अब तक किए गए कामकाज के बारे में जानकारी ली। बैठक में प्रधानमंत्री ने पदाधिकारियों की बातों को ध्यान से सुना और संगठन को मजबूत करने के लिए अपने अनुभव भी साझा किए।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन में बेहतर तालमेल और सामूहिक जिम्मेदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पदाधिकारियों से कहा कि पार्टी के भीतर टीम के रूप में काम करने की भावना मजबूत होनी चाहिए और संगठन के हर स्तर पर आपसी समन्वय दिखाई देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने अपने उस दौर का अनुभव भी साझा किया, जब वह संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने बताया कि संगठन को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच मजबूत संवाद, सामंजस्य और जमीन पर लगातार सक्रियता जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पार्टी की हर रणनीति का उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच बढ़ाना होना चाहिए। उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों को सलाह दी कि पार्टी के प्रयास केवल बैठकों और योजनाओं तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर आम लोगों के बीच भी दिखाई देना चाहिए। अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ने और जनता के साथ सीधा संपर्क मजबूत करने की दिशा में लगातार काम करने पर जोर दिया गया।
इस बैठक में प्रधानमंत्री ने नई टीम के सदस्यों के साथ व्यक्तिगत संवाद को भी खास महत्व दिया। उन्होंने अलग-अलग पदाधिकारियों से परिचय लिया और उनके अनुभवों के बारे में जाना। इससे बैठक केवल औपचारिक संगठनात्मक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि नेतृत्व और नई टीम के बीच सीधे संवाद का अवसर भी बना। प्रधानमंत्री ने नए पदाधिकारियों के विचारों और अनुभवों को सुनते हुए संगठन को लेकर आगे की दिशा पर चर्चा की।
बैठक की शुरुआत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष की मौजूदगी में हुई थी। नई टीम के सभी पदाधिकारियों के बीच परिचय कराया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री के साथ शाम तक बातचीत का दौर चला। नई टीम में कई अनुभवी नेताओं और अलग-अलग राज्यों से आने वाले चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें वसुंधरा राजे, राम माधव, सुनील बंसल, पीयूष गोयल और स्मृति ईरानी जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के नेता हरीश द्विवेदी को भी राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
इस बैठक के दौरान पार्टी के संगठनात्मक कामकाज के साथ-साथ वंदे मातरम को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया गया। नई टीम की पहली बैठक में पार्टी ने राष्ट्रीय गीत को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। इसके अलावा संगठन के भीतर सामंजस्य और सामूहिक जिम्मेदारी पर भी चर्चा हुई। बैठक ऐसे समय हुई है जब पार्टी आने वाले चुनावों और अपने संगठनात्मक विस्तार की तैयारियों को आगे बढ़ा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद संगठनात्मक बैठकों की उपयोगिता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी बैठकें लगातार होती रहनी चाहिए क्योंकि इनके जरिए आपसी संवाद बेहतर होता है और संगठन में नए विचार तथा नए दृष्टिकोण सामने आते हैं। उनके मुताबिक, विचारों के आदान-प्रदान से संगठन को मजबूत करने और लोगों के साथ संपर्क को और प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।
प्रधानमंत्री के साथ नई राष्ट्रीय टीम की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि नितिन नवीन के नेतृत्व में गठित टीम अब पार्टी के संगठनात्मक कामकाज को आगे बढ़ाएगी। नई टीम में अनुभव और नए चेहरों का मिश्रण रखा गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री की ओर से दिए गए संगठन, समन्वय, टीमवर्क और जमीनी संपर्क के मंत्र नई टीम के लिए आगे की कार्यशैली का आधार बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जिस तरह सामूहिक जिम्मेदारी और जमीन से जुड़े रहने पर जोर दिया, उससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी का संगठनात्मक फोकस केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित रखने के बजाय बूथ और जमीनी स्तर तक मजबूत संपर्क बनाने पर रहेगा। नई टीम से अपेक्षा होगी कि वह अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय बनाए, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाए और जनता से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम करे।
कुल मिलाकर, नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम के साथ प्रधानमंत्री मोदी की करीब 5 घंटे की बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में जहां प्रधानमंत्री ने नई टीम के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से समझने की कोशिश की, वहीं अपने लंबे संगठनात्मक अनुभव के आधार पर उन्हें टीमवर्क, समन्वय, साझा जिम्मेदारी और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने का संदेश दिया। अब नई टीम इन सुझावों को संगठन के कामकाज में किस तरह लागू करती है, इस पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।
