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धर्मस्थल मंदिर में शपथ दिलाने की चर्चा पर प्रह्लाद जोशी ने लगाई रोक, बोले- आस्था के केंद्र को राजनीति में न घसीटें

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कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर मचा राजनीतिक घमासान अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा यह सुझाव दिया गया था कि जिन विधायकों पर पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने का संदेह है, उन्हें धर्मस्थल स्थित प्रसिद्ध श्री मंजुनाथ मंदिर ले जाकर शपथ दिलाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। हालांकि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि किसी धार्मिक स्थल को राजनीतिक विवादों और संगठनात्मक जांच का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

दरअसल, हाल ही में हुए कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और पार्टी के भीतर यह आशंका जताई गई कि कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। चुनाव परिणामों के बाद भाजपा नेतृत्व में बेचैनी बढ़ गई और इस पूरे मामले की जांच के लिए आंतरिक स्तर पर प्रक्रिया शुरू की गई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने पहले संकेत दिए थे कि विधायकों की बैठक धर्मस्थल में आयोजित की जा सकती है और वहां सच्चाई उजागर करने का प्रयास होगा।

इसी प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा कि धर्मस्थल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और उसे राजनीतिक गतिविधियों या दलगत विवादों से जोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी को क्रॉस वोटिंग की जांच करनी है तो उसके लिए संगठनात्मक और राजनीतिक तरीके मौजूद हैं, लेकिन धार्मिक संस्थानों को इस प्रक्रिया में शामिल करना सही संदेश नहीं देगा।

एमएलसी चुनाव के बाद भाजपा नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया गया और उनसे चुनावी नतीजों तथा कथित क्रॉस वोटिंग के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। कर्नाटक भाजपा के नेता आर. अशोक और प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देने की बात कही है। पार्टी हाईकमान यह जानना चाहता है कि आखिर किन कारणों से कुछ वोट पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में नहीं पड़े।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल चुनावी हार तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता से भी जुड़ा हुआ है। विपक्षी दल इस मुद्दे को भाजपा की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि भाजपा नेतृत्व इसे पार्टी अनुशासन का मामला बताते हुए दोषियों की पहचान करने में जुटा है। ऐसे में धर्मस्थल मंदिर का नाम सामने आने से विवाद और बढ़ गया था, जिसे प्रह्लाद जोशी ने अपने बयान से शांत करने की कोशिश की है।

फिलहाल भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि क्रॉस वोटिंग की जांच जारी रहेगी और यदि किसी विधायक की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं प्रह्लाद जोशी के बयान से यह भी स्पष्ट हो गया है कि पार्टी धार्मिक आस्था के प्रतीकों को राजनीतिक जांच का माध्यम बनाने के पक्ष में नहीं है। आने वाले दिनों में जांच समिति की रिपोर्ट और केंद्रीय नेतृत्व के फैसले इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।

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