स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की सुरक्षा, विकास और राष्ट्रीय एकता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। संबोधन में उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’, नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और भारत की बदलती तस्वीर का उल्लेख किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 14 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में हुई प्रगति और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ सटीक कार्रवाई करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया और आतंकियों तथा उन्हें समर्थन देने वालों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे कहीं भी छिपे हों, उन्हें अपने कृत्यों के परिणाम भुगतने होंगे। राष्ट्रपति ने कारगिल विजय दिवस का भी स्मरण करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और बलिदान को नमन किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को मजबूत करने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। उन्होंने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का जिक्र करते हुए इसे देशहित और विशेष रूप से किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों की रक्षा को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।
आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चल रहे संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद देश के सामने एक गंभीर चुनौती रहा, लेकिन अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी विकास और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने इन इलाकों में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों का भी उल्लेख किया, जिन्हें प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी अहम स्थान दिया। उन्होंने कहा कि छात्र देश के भविष्य के निर्माता हैं और उनके वर्तमान तथा भविष्य को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित तरीकों पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाने की बात भी कही गई, ताकि परीक्षाएं अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकें।
राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय आया जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। उन्होंने देशवासियों के सामने सुरक्षा, विकास और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को एक साथ रखा। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई से लेकर नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव और परीक्षा व्यवस्था में सुधार तक, उनके संबोधन में देश के सामने मौजूद कई महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
कुल मिलाकर, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा, भारतीय सशस्त्र बलों का साहस, ऑपरेशन सिंदूर, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, सिंधु जल संधि का निलंबन, नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और पेपर लीक जैसी चुनौतियों पर विशेष जोर रहा। राष्ट्रपति ने देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था की आवश्यकता पर भी बल दिया।
