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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने INS वाघशीर में समुद्री यात्रा कर इतिहास रचा, भारतीय नौसेना के उपकरणों का किया निरीक्षण

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को भारतीय नौसेना की आधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी INS वाघशीर में समुद्र के भीतर एक ऐतिहासिक यात्रा कर राष्ट्रीय रक्षा और समुद्री क्षमताओं के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा है। राष्ट्रपति के इस कदम से भारतीय नौसेना के साथ मजबूत संवाद और विश्वास का संदेश गया है, क्योंकि उन्होंने कलवारी-क्लास पनडुब्बी में सॉर्टी (समुद्री यात्रा) करके उस भूमिका को करीब से अनुभव किया, जो समंदर में देश की रक्षा और रणनीतिक उपस्थिति के लिए महत्वपूर्ण है। यह यात्रा कर्नाटक के करवार नौसैनिक अड्डे से शुरू हुई, जहाँ राष्ट्रपति ने नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के साथ पनडुब्बी की परिचालन क्षमताओं और रणनीतिक महत्व पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

इस ऐतिहासिक सॉर्टी के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू, जो भारतीय सशस्त्र बलों की सुप्रीम कमांडर भी हैं, ने पनडुब्बी दल के साथ बातचीत की और उनके समर्पण, अनुशासन तथा कठिन समुद्री परिस्थितियों में तैनाती के अनुभवों को जाना। उन्होंने INS वाघशीर की तकनीकी क्षमताओं — जैसे कि गुप्त संचालन, समर्पित उपग्रह-संचालन और लंबी अवधि तक समुद्र में रहकर मिशन पूरा करने की क्षमता — पर अपनी प्रशंसा व्यक्त की। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने नौसेना के जवानों की पेशेवर दक्षता और देश की समुद्री सुरक्षा में उनके योगदान की सराहना की।

राष्ट्रपति मुर्मू भारत की दूसरी राष्ट्रपति हैं जिन्होंने पनडुब्बी यात्रा की है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने फरवरी 2006 में पहली बार पनडुब्बी सॉर्टी की थी, लेकिन यह मुर्मू की यह यात्रा कलवारी-क्लास पनडुब्बी के जरिए प्रथम है, जो भारत की स्वदेशी क्षमताओं का प्रतीक है। इस पनडुब्बी की परियोजना प्रोजेक्ट-75 के अंतर्गत विकसित की गई और इसे जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया।

इस दौरान राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना की रणनीति, समुद्री कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से त्रि-सेना एकीकृत रुख की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री ताकत का यह अनुभव और पनडुब्बी जैसे उपकरणों का प्रत्यक्ष अवलोकन उनके लिए गर्व का विषय है और यह सशस्त्र बलों की तैयारियों और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रपति का यह कदम भारतीय नौसेना के मनोबल और विश्व में भारत की समुद्री मौजूदगी को और मजबूती प्रदान करेगा। INS वाघशीर जैसे उपकरणों के लिए उच्च स्तर पर मार्गदर्शन और समर्थन का अनुभव नौसेना कर्मियों के उत्साह में इजाफा करेगा, जबकि यह संदेश भी स्पष्ट करता है कि भारत समुद्री सुरक्षा में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देता है।

इस ऐतिहासिक यात्रा का व्यापक रूप से देश और नौसेना के भीतर सकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है, और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण उत्साहवर्धक कदम के रूप में लिया जा रहा है। इस प्रकार, राष्ट्रपति मुर्मू ने न केवल नौसेना के अद्वितीय तत्वों को समझा बल्कि देशवासियों को भी भारतीय सशस्त्र बलों की अदम्य तैयारियों का संदेश दिया।

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