कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के मामलों और छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री और गृह मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रही है। प्रियंका गांधी ने कहा कि जो छात्र अपने भविष्य और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, उनके साथ बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के युवाओं का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है क्योंकि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। उनके अनुसार लाखों छात्र वर्षों की मेहनत, आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक दबाव के बीच परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब प्रश्नपत्र लीक हो जाते हैं तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने में विफल रही है और जिम्मेदारी तय करने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने छात्र आंदोलन के दौरान कथित लाठीचार्ज को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि छात्रों को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा और उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की गई।
इस मुद्दे को लेकर संसद के भीतर और बाहर भी राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्र आंदोलन पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं बल्कि देश की पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता का प्रश्न बन चुका है। इसी कारण संसद में भी सरकार को लगातार घेरने की रणनीति अपनाई जा रही है।
प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री और गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में लगातार खामियां सामने आ रही हैं और छात्रों को न्याय नहीं मिल रहा है तो संबंधित मंत्रालयों को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए और ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल न उठे।
दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सुधारों का भरोसा भी दिया है। हाल के घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना की घोषणा की है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं और जिम्मेदारी तय होने के साथ-साथ ठोस परिणाम भी दिखाई देने चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों ने युवाओं के बीच चिंता और असंतोष को बढ़ाया है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों के लिए यह आवश्यक होगा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ऐसी परीक्षा प्रणाली विकसित की जाए जिस पर छात्रों का विश्वास कायम हो सके। आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति में यह मुद्दा प्रमुखता से बना रहने की संभावना है, क्योंकि लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य इससे सीधे जुड़ा हुआ है।
