Site icon Prsd News

मनुस्मृति पर राहुल गांधी का हमला, BJP ने लगाया हिंदू-विरोधी नैरेटिव का आरोप

images 6 19

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मनुस्मृति और महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पुणे में छात्रों के साथ संवाद के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता और समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक सोच का मुद्दा उठाते हुए मनुस्मृति की आलोचना की। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए खुद खड़े होने की अपील की। राहुल गांधी के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस पर मनुस्मृति को लेकर चुनिंदा तरीके से बात करने और हिंदू धर्म के खिलाफ नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि एक महिला किसी और की नहीं, बल्कि खुद की होती है। उन्होंने महिलाओं से अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने और किसी के दबाव में न आने की बात कही। राहुल ने देश की करीब 70 करोड़ महिलाओं को भारत की सबसे बड़ी संपत्ति बताते हुए कहा कि महिलाएं भविष्य को लेकर पुरुषों की तुलना में अधिक आगे की सोच रखती हैं। उनके भाषण में महिलाओं की स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और समाज में मौजूद भेदभाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

इसी दौरान राहुल गांधी ने मनुस्मृति का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इसमें महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने वाली सोच दिखाई देती है। उन्होंने पितृसत्तात्मक व्यवस्था की आलोचना करते हुए BJP और RSS पर भी महिलाओं को सीमित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। राहुल के मुताबिक महिलाओं को अपनी जिंदगी और फैसलों पर खुद अधिकार होना चाहिए और समाज को उनके साथ पुरुषों के समान व्यवहार करना चाहिए।

राहुल गांधी की टिप्पणी सामने आने के बाद BJP ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। BJP नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस पर हिंदू धर्मग्रंथों को चुनिंदा तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आधिकारिक बयान मनुस्मृति की चयनात्मक और गलत व्याख्या का एक और उदाहरण है और इसके जरिए हिंदू-विरोधी नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की जा रही है। अमित मालवीय ने राहुल गांधी को मनुस्मृति को पूरी तरह पढ़ने की सलाह भी दी।

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक उपदेश देने का आरोप लगाते हुए नेहरू-गांधी परिवार के इतिहास का हवाला दिया। दुबे ने अपने बयान में प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और महिलाओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस के पुराने राजनीतिक फैसलों का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी के बयान को चुनौती देने की कोशिश की।

BJP की ओर से यह भी कहा गया कि मनुस्मृति को केवल उन अंशों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, जिनकी आलोचना राहुल गांधी कर रहे हैं। BJP नेताओं ने मनुस्मृति के उन श्लोकों का भी हवाला दिया जिनमें महिलाओं के सम्मान की बात कही गई है। उनका तर्क है कि किसी भी धार्मिक या ऐतिहासिक ग्रंथ की समग्रता में चर्चा होनी चाहिए और चुनिंदा अंशों के आधार पर पूरे ग्रंथ या हिंदू परंपरा पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।

इस पूरे विवाद के बीच राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता को अपने राजनीतिक भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उन्होंने समाज में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग मानदंड होने की भी आलोचना की। पुणे के कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लड़कियों द्वारा अपशब्दों के इस्तेमाल पर सांस्कृतिक आपत्ति जताई जाती है, जबकि लड़कों के मामले में ऐसा रवैया नहीं दिखता। राहुल ने इसे पितृसत्तात्मक सोच का उदाहरण बताया।

राहुल गांधी ने परीक्षा में पेपर लीक जैसे मुद्दों का भी महिलाओं के संदर्भ में उल्लेख किया। उनका तर्क था कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों पर होने वाली गड़बड़ियों का महिलाओं पर अलग प्रभाव पड़ता है। उन्होंने महिलाओं को केवल परिवार या समाज की भूमिका तक सीमित रखने वाली सोच को बदलने की जरूरत बताई और युवतियों से अपनी आवाज उठाने की अपील की।

मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस और BJP के बीच विवाद नया नहीं है। भारतीय राजनीति में यह ग्रंथ लंबे समय से सामाजिक न्याय, जाति व्यवस्था, महिलाओं के अधिकार और हिंदू सामाजिक परंपराओं को लेकर बहस का विषय रहा है। राहुल गांधी का ताजा बयान इसी पुराने वैचारिक विवाद को एक बार फिर राजनीतिक मंच पर ले आया है। कांग्रेस इसे महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता का मुद्दा बता रही है, जबकि BJP इसे हिंदू धर्म और उसके ग्रंथों की चयनात्मक व्याख्या से जोड़ रही है।

फिलहाल इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। राहुल गांधी जहां महिलाओं के अधिकार, स्वतंत्रता और लैंगिक समानता को लेकर BJP और RSS की विचारधारा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं BJP नेता उनके बयानों को हिंदू-विरोधी नैरेटिव से जोड़कर पलटवार कर रहे हैं। ऐसे में मनुस्मृति और महिला अधिकारों का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का एक और बड़ा केंद्र बन सकता है।

Exit mobile version