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एपस्टीन फाइल्स को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला, बयान से गरमाई देश की राजनीति

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कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा उठाया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों में प्रधानमंत्री, उनके कुछ मंत्रियों और सहयोगियों के नाम सामने आने की बातें कही जा रही हैं, जिसे उन्होंने देश के लिए शर्मनाक बताया। इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और सत्ता तथा विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है।

राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि लोकतांत्रिक विरोध और अहिंसा देश की बुनियादी ताकत हैं और लोगों को सवाल पूछने का अधिकार है। उन्होंने प्रधानमंत्री की संसद में अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है। राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामलों से जुड़े आरोप देश के नेतृत्व की छवि पर सवाल खड़े करते हैं और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के किसानों, मजदूरों और छोटे उद्योगों के हितों की रक्षा करना विपक्ष की जिम्मेदारी है और कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को उठाती रहेगी। राहुल गांधी के अनुसार, सरकार के खिलाफ उठाए जा रहे सवाल लोकतंत्र का हिस्सा हैं और इन्हें दबाया नहीं जाना चाहिए।

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में एक वैश्विक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टिप्पणी की थी। प्रधानमंत्री ने इस प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसे देश की छवि के लिए नुकसानदायक बताया था। राहुल गांधी का वीडियो उसी बयान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा पिछले कुछ समय से भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। संसद के बजट सत्र के दौरान भी राहुल गांधी ने इस मामले को उठाया था, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध किया और सदन में हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगते हुए पारदर्शिता की मांग की है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को निराधार बता चुका है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में और तेज हो सकता है, क्योंकि एपस्टीन फाइल्स को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएं चल रही हैं और विपक्ष इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश कर रहा है। राहुल गांधी के ताजा बयान से साफ है कि यह मुद्दा निकट भविष्य में भारतीय राजनीति में प्रमुख बहस का विषय बना रह सकता है।

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