पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है और इसी कड़ी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों पर जोरदार हमला बोला उन्होंने खासतौर पर भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील को लेकर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह समझौता देश के हित में नहीं है बल्कि इससे भारतीय किसानों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है राहुल गांधी ने कहा कि इस तरह के समझौते भारत की आर्थिक स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं और देश को बाहरी दबाव में ला सकते हैं
राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस ट्रेड डील के जरिए अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिया है जिससे देश के किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है उन्होंने कहा कि भारत के छोटे किसान पहले ही सीमित संसाधनों के साथ संघर्ष कर रहे हैं ऐसे में विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा उनके लिए और मुश्किलें बढ़ा सकती है राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि सरकार के फैसले बड़े उद्योगपतियों और विदेशी हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं न कि आम जनता को ध्यान में रखकर
रैली के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि उनकी नीतियां देश के हितों के खिलाफ जा रही हैं उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को ऐसे समझौतों के जरिए कमजोर किया जा रहा है और सरकार पारदर्शिता के साथ काम नहीं कर रही है उन्होंने यह भी कहा कि देश के किसानों और युवाओं के भविष्य के साथ समझौता किया जा रहा है और यह स्थिति लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं जहां विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है वहीं सत्ताधारी पक्ष भी अपने विकास और नीतियों को लेकर जनता के बीच जा रहा है चुनावी मुकाबला इस बार काफी कड़ा माना जा रहा है क्योंकि राज्य में विभिन्न राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं और जनता को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार रैलियां और प्रचार अभियान चला रहे हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में चुनावी मुद्दा बन सकते हैं और इसका असर मतदाताओं के फैसले पर भी पड़ सकता है खासकर किसान और मध्यम वर्ग इस मुद्दे पर अपनी राय को लेकर ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं अब देखना यह होगा कि चुनाव के नतीजों में इन आरोपों और मुद्दों का कितना असर देखने को मिलता है
