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राम मंदिर ट्रस्ट के 124 करोड़ रुपये खर्च की SIT जांच तेज, प्राण प्रतिष्ठा से लेकर ध्वजारोहण तक के खर्चों की होगी पड़ताल

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अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा पिछले दो वर्षों में विभिन्न धार्मिक और भव्य आयोजनों पर किए गए लगभग 124 करोड़ रुपये के खर्च की जांच अब तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और दान में प्राप्त कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल कर रहा है। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर से जुड़े आयोजनों में खर्च की गई राशि निर्धारित नियमों, स्वीकृत प्रक्रियाओं और पारदर्शी वित्तीय मानकों के अनुरूप उपयोग की गई या नहीं।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में सबसे प्रमुख आयोजन जनवरी 2024 में आयोजित रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को रखा गया है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देश-विदेश से हजारों अतिथियों ने भाग लिया था और इस आयोजन पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऑडिट रिकॉर्ड के अनुसार, टेंट सिटी और अस्थायी ढांचों की स्थापना, अक्षत पूजन अभियान, प्रचार-प्रसार, सजावट, प्रकाश व्यवस्था, भोजन तथा धार्मिक अनुष्ठानों पर बड़ी राशि खर्च की गई थी। SIT इन सभी मदों से संबंधित बिल, भुगतान वाउचर और अनुमोदन दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि खर्च की वास्तविकता और औचित्य का आकलन किया जा सके।

जांच एजेंसियां नवंबर 2025 में आयोजित ध्वजारोहण समारोह की वित्तीय व्यवस्था का भी विश्लेषण कर रही हैं। ट्रस्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक इस कार्यक्रम पर लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए थे, जिसमें बड़ी संख्या में विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया था। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि प्रति अतिथि होने वाला खर्च ट्रस्ट के निर्धारित वित्तीय नियमों और स्वीकृत सीमाओं के अनुरूप था या नहीं।

SIT केवल खर्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए गए सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का भी भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले वर्षों में मंदिर को कई किलोग्राम सोना और बड़ी मात्रा में चांदी दान स्वरूप प्राप्त हुई थी। जांच टीम इन बहुमूल्य धातुओं के भंडारण, इन्वेंट्री प्रबंधन और वर्तमान स्थिति से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को समाप्त किया जा सके।

इस बीच, राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से लगातार पारदर्शिता बनाए रखने का दावा किया जा रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि सभी वित्तीय गतिविधियां निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत संचालित होती हैं और समय-समय पर उनका ऑडिट भी कराया जाता है। हालांकि, बढ़ती जांच और वित्तीय रिकॉर्ड के दोबारा परीक्षण ने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में SIT की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि खर्चों में कोई अनियमितता हुई है या सभी वित्तीय लेन-देन नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं।

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