बॉलीवुड फिल्म धुरंधर 2 को लेकर जारी बहस के बीच अभिनेता और सांसद Ravi Kishan का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने फिल्म का खुलकर समर्थन करते हुए इसे “समाज का आईना” बताया और कहा कि इस फिल्म के जरिए लोगों को अब यह समझ आने लगा है कि देश में नोटबंदी जैसे फैसले क्यों लिए गए थे। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।
दरअसल, Dhurandhar: The Revenge, जिसे Aditya Dhar ने निर्देशित किया है, रिलीज के बाद से ही जबरदस्त चर्चा में है। एक तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर “प्रोपेगेंडा” होने के आरोप भी लग रहे हैं। ऐसे में रवि किशन ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सिनेमा हमेशा समाज की सच्चाई को दर्शाता है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
रवि किशन ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि “सिनेमा समाज का आईना होता है, जो समाज में हो रहा है, वही फिल्मों में दिखता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस फिल्म ने लोगों को कई ऐसे मुद्दों पर सोचने पर मजबूर किया है, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया जाता था। खासतौर पर उन्होंने नोटबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि अब लोगों को इसके पीछे की वजह समझ में आने लगी है।
गौरतलब है कि साल 2016 में भारत सरकार ने बड़े नोटों को बंद करने का फैसला लिया था, जिसे 2016 Indian banknote demonetisation के नाम से जाना जाता है। इस फैसले का उद्देश्य काले धन पर रोक, नकली नोटों पर नियंत्रण और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना था। अब इसी मुद्दे को लेकर फिल्म में दिखाए गए कथानक और रवि किशन के बयान ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया है।
फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच दो तरह की राय सामने आ रही है। एक वर्ग इसे देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों को उजागर करने वाली मजबूत फिल्म मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे एकतरफा सोच को बढ़ावा देने वाला सिनेमा बता रहा है। यही वजह है कि फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक वैचारिक बहस का हिस्सा बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फिल्मों का असर केवल बॉक्स ऑफिस तक नहीं होता, बल्कि यह समाज और राजनीति के बीच संवाद को भी प्रभावित करती हैं। धुरंधर 2 की सफलता और उससे जुड़े विवाद यह दिखाते हैं कि आज का दर्शक सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि कंटेंट में छिपे संदेश को भी गंभीरता से ले रहा है।
कुल मिलाकर, रवि किशन के बयान ने फिल्म को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। जहां एक ओर फिल्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को लेकर चर्चा भी गहराती जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद फिल्म की सफलता को और ऊंचाइयों तक ले जाता है या इसे नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
