गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन एक बार फिर अपने शहर की तुलना स्पेन से करने को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उन्हें गोरखपुर स्पेन जैसा लगता है और अगर किसी को विकास नजर नहीं आता तो यह उसकी समस्या है। उनके इस बयान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मुस्कुराते नजर आए। रवि किशन की इस टिप्पणी के बाद अब गोरखपुर और स्पेन की वास्तविक स्थिति, खासकर सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और अपराध के आंकड़ों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
सबसे पहले आकार की बात करें तो गोरखपुर और स्पेन की तुलना वास्तव में दो अलग स्तरों की तुलना है। स्पेन एक पूरा देश है, जबकि गोरखपुर उत्तर प्रदेश का एक जिला और प्रमुख शहर है। स्पेन का क्षेत्रफल 5.06 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक है, जबकि गोरखपुर जिले का क्षेत्रफल करीब 3,484 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। यानी क्षेत्रफल के लिहाज से स्पेन गोरखपुर से 150 गुना से भी ज्यादा बड़ा है। आबादी के मामले में भी स्पेन में करीब 4.85 करोड़ लोग रहते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश की आबादी ही लगभग 22 करोड़ के आसपास है।
अब बात करते हैं उस इंफ्रास्ट्रक्चर की, जिसके आधार पर रवि किशन गोरखपुर के विकास की तुलना स्पेन से कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक स्पेन का सड़क नेटवर्क 17,600 किलोमीटर से अधिक लंबा है और यूरोप में उसका हाईवे नेटवर्क सबसे बड़े नेटवर्क में शामिल है। रोड कनेक्टिविटी के मामले में भी स्पेन को दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाता है। इसके अलावा देश में करीब 15,600 किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क है, जिसमें लगभग 4,000 किलोमीटर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है। स्पेन में करीब 50 एयरपोर्ट हैं और मैड्रिड तथा बार्सिलोना के एयरपोर्ट यूरोप के प्रमुख एयरपोर्ट में शामिल हैं।
सुरक्षा के मामले में भी स्पेन और भारत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। 2026 की Global Peace Index रैंकिंग में स्पेन 163 देशों में 27वें स्थान पर है। वहां आम अपराधों में पर्यटक क्षेत्रों में जेब काटना और छोटी-मोटी चोरी जैसी घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार स्पेन में हर साल लगभग 300 से 350 हत्याएं होती हैं, जबकि प्रति 10 लाख आबादी पर हत्या की दर करीब 6 से 7 बताई गई है। तुलना में भारत में यह आंकड़ा करीब 28 से 30 हत्याएं प्रति 10 लाख आबादी बताया गया है।
अर्थव्यवस्था की तस्वीर दोनों जगहों के बीच और भी बड़ा अंतर दिखाती है। स्पेन दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी GDP 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बताई गई है। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश की GDP करीब 30 लाख करोड़ रुपये और गोरखपुर की GDP करीब 20,102 करोड़ रुपये है। इस हिसाब से स्पेन की अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश से कई गुना बड़ी है। स्पेन की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भी बड़ी भूमिका है और 2025 में वह दुनिया के सबसे ज्यादा पर्यटकों वाले देशों में दूसरे स्थान पर रहा था।
सबसे ज्यादा अंतर प्रति व्यक्ति आय में दिखाई देता है। World Bank के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि स्पेन में प्रति व्यक्ति सालाना औसत आय करीब 38,627 डॉलर यानी लगभग 36.75 लाख रुपये है। इसके मुकाबले भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 1.92 लाख रुपये और उत्तर प्रदेश की करीब 1.26 लाख रुपये बताई गई है। यानी औसत आय के स्तर पर स्पेन और भारत के बीच बहुत बड़ा अंतर है।
हालांकि, रवि किशन की टिप्पणी को केवल आंकड़ों की सीधी तुलना के रूप में देखना भी सही नहीं होगा। उनका बयान मुख्य रूप से गोरखपुर में पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास कार्यों और शहर के बदलते स्वरूप की प्रशंसा के संदर्भ में आया था। गोरखपुर में सड़क, रेलवे, एयर कनेक्टिविटी, मेडिकल सुविधाओं और शहरी विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट हुए हैं। इसी बदलाव को लेकर रवि किशन ने अपने अंदाज में शहर को स्पेन जैसा बताया।
इसलिए अगर रवि किशन के बयान को शाब्दिक आर्थिक तुलना के तौर पर लिया जाए तो गोरखपुर और स्पेन के बीच बहुत बड़ा अंतर है। लेकिन अगर इसे गोरखपुर में हुए स्थानीय विकास की तारीफ के तौर पर समझा जाए, तो यह उनके राजनीतिक और सार्वजनिक भाषण का हिस्सा है। असल आंकड़े बताते हैं कि स्पेन एक विकसित यूरोपीय देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, परिवहन नेटवर्क और राष्ट्रीय स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर गोरखपुर जैसे एक शहर या जिले से सीधे तुलना करने लायक नहीं है।
कुल मिलाकर, रवि किशन का ‘गोरखपुर स्पेन जैसा लगता है’ वाला बयान राजनीतिक और सोशल मीडिया चर्चा का विषय जरूर बन गया है, लेकिन आंकड़ों के आधार पर दोनों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में अभी बहुत बड़ा अंतर है। गोरखपुर में विकास हुआ है और शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है, लेकिन स्पेन के स्तर से तुलना करने के लिए प्रति व्यक्ति आय, रोजगार, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और व्यापक आर्थिक विकास जैसे कई मानकों पर अभी लंबी दूरी तय करनी होगी।
