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शिमला: रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने हड़ताल वापस ली, अब चिकित्सक ड्यूटी पर लौटेंगे

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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने वाला रेजिडेंट डॉक्टरों का आंदोलन अब समाप्ति की ओर है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) और अस्पताल में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा, जो तीन हफ़्ते से अधिक समय से जारी थी, रविवार को रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (RDA) ने वापस ले ली है और डॉक्टर ड्यूटी पर लौटने के लिए तैयार हैं। इस फैसले से अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के पुनः संचालन की राह साफ हो गई है।

यह आंदोलन उस समय शुरू हुआ था जब IGMC में सिनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला के खिलाफ एक मरीज के साथ कथित मारपीट के वायरल वीडियो के बाद उनकी बर्खास्तगी कर दी गई थी। वीडियो और मामले ने सोशल मीडिया में व्यापक ध्यान खींचा और डॉक्टर समुदाय में असंतोष फैल गया। डॉक्टरों ने यह कार्रवाई एकतरफा बताते हुए तात्कालिक बहाली, उच्च स्तरीय जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप निष्पक्ष परीक्षण की मांग की थी।

हड़ताल के दौरान IGMC के साथ-साथ कई सरकारी अस्पतालों में आउट-प्रथम सेवाएं (OPD), रूटीन जांच-परख, और इलेक्टिव सर्जरी स्थगित रहीं, जिससे मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाएँ (Emergency services) सुचारू रूप से जारी रहीं, ताकि जिनका जीवन-निर्माण संबंधी इलाज आवश्यक था, उन्हें किसी भी हाल में राहत मिलती रहे।

राज्य सरकार ने इस विवाद के समाधान के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में डॉक्टरों से सीधे बातचीत की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की विस्तृत, निष्पक्ष और विद्यापीठ-स्तरीय जांच समिति गठन की जाएगी, साथ ही डॉ. राघव नरूला की बर्खास्तगी के आदेश की समीक्षा भी की जाएगी। इसी आश्वासन और भरोसे के आधार पर RDA ने पार्टी रद्द करने का निर्णय लिया और डॉक्टरों ने ड्यूटी पर लौटने का फैसला किया।

रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि शरीर में दोनों पक्षों की गलती के पहलू पाए जाने के बावजूद केवल डॉक्टर पर नैतिक और पेशेवर कार्रवाई की गई, जो अनुचित प्रतीत हुई। उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच से यह स्पष्ट होगा कि किन परिस्थितियों में यह घटना घटी और भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए क्या सुधारात्मक उपाय किए जा सकते हैं।

इस विवाद ने न केवल चिकित्सक समुदाय के अंदर की चुनौतियों को उजागर किया है, बल्कि अस्पताल सुरक्षा, अस्पताल-भीतरी हिंसा प्रबंधन, और चिकित्सीय पेशे की गरिमा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही शुरू होने वाली जांच से न्याय की प्रक्रिया मजबूत होगी, और इससे डॉक्टर-रोगी संबंधों के तनाव को भी शांत करने में मदद मिलेगी।

अब जब डॉक्टर ड्यूटी पर लौटेंगे, तो प्रदेश भर के अस्पतालों में सेवाओं के सामान्य संचालन की उम्मीदें बढ़ गई हैं और मरीजों को राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि वे भविष्य में इसी तरह के विवादों से बचने के लिए सुरक्षित कार्य-पर्यावरण, बेहतर सुरक्षा उपाय, और प्रशिक्षित मध्यस्थता तंत्र को मजबूत करेंगे, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी भी तरह की असहजता या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।

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