कोलकाता के ठाकुरपुकुर इलाके में रहने वाले 70 साल के समीर काका इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उनकी कहानी एक वायरल वीडियो के जरिए लोगों तक पहुंची है। समीर काका रोज अपने घर से करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर उस जगह पहुंचते हैं, जहां वह गुब्बारे बेचते हैं। वहां छह घंटे से ज्यादा समय तक ग्राहकों का इंतजार करने के बाद वह करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर वापस घर लौटते हैं। इस तरह उनकी रोज की यात्रा करीब 8 किलोमीटर की होती है।
समीर काका पिछले करीब 26 साल से गुब्बारे बेचकर परिवार का खर्च चलाने की कोशिश कर रहे हैं। वायरल वीडियो के मुताबिक, उन्हें एक दिन में आमतौर पर करीब 150 रुपये की कमाई होती है। वह अपने पांच सदस्यों वाले परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य बताए गए हैं। ऐसे में उम्र बढ़ने और शारीरिक परेशानियों के बावजूद उनका रोज काम पर निकलना परिवार की जरूरत से जुड़ा हुआ है।
समीर की मुश्किलें सिर्फ उम्र तक सीमित नहीं हैं। बताया गया है कि कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक आया था, जिसके बाद वह लंबे समय तक लकवे की समस्या से जूझते रहे। इसके बाद उनकी गर्दन भी पूरी तरह सीधी नहीं हो पाती। इसके अलावा उनके पैरों में त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारी बताई गई है, जिसकी वजह से चलने में उन्हें दर्द और परेशानी होती है। इसके बावजूद वह रोज गुब्बारों का गुच्छा लेकर घर से निकलते हैं।
समीर काका की कहानी सोशल मीडिया क्रिएटर अराधना चटर्जी के एक वीडियो के जरिए सामने आई। अराधना ने बताया कि उन्होंने बुजुर्ग व्यक्ति को सड़क पर धीरे-धीरे चलते और लंगड़ाते हुए देखा था। उनके हाथ में गुब्बारे थे और वह लगातार ग्राहकों की तलाश कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने बातचीत के जरिए उनकी जिंदगी और रोजमर्रा की मुश्किलों के बारे में जानकारी जुटाई और वीडियो के माध्यम से इसे लोगों तक पहुंचाया।
वीडियो में सामने आया कि समीर काका पहले करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर बिक्री वाली जगह पर पहुंचते हैं। इसके बाद वह कई घंटे तक सड़क पर ग्राहकों का इंतजार करते हैं। दिन खत्म होने के बाद उन्हें उतनी ही दूरी पैदल तय करके वापस अपने किराए के घर जाना पड़ता है। यानी गुब्बारे बेचने के लिए उन्हें रोज करीब 8 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
उनकी रोज की कमाई करीब 150 रुपये बताई गई है। परिवार के पांच सदस्यों की जिम्मेदारी होने के कारण यह रकम उनके लिए महत्वपूर्ण बताई गई है। सोशल मीडिया पर कहानी सामने आने के बाद कई लोगों ने उनकी स्थिति पर प्रतिक्रिया दी और वीडियो साझा करने वाली अराधना चटर्जी की भी तारीफ की। लोगों ने कहा कि ऐसे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और संघर्ष सामने आना जरूरी है।
समीर काका की कहानी इसलिए भी लोगों का ध्यान खींच रही है क्योंकि वह ऐसी उम्र में भी काम कर रहे हैं, जब कई लोग शारीरिक कारणों से नियमित काम करने में सक्षम नहीं होते। उनके मामले में उम्र के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हैं, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी के चलते उनका काम जारी है। हालांकि, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और आय से जुड़ी जानकारी मुख्य रूप से वायरल वीडियो पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस कहानी ने बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति और रोजमर्रा की मेहनत को लेकर भी चर्चा शुरू की है। समीर काका के लिए यह कोई एक दिन की कहानी नहीं, बल्कि करीब 26 वर्षों से चल रही रोजमर्रा की जिंदगी है। अगले दिन भी उन्हें घर से निकलकर वही दूरी तय करनी है, गुब्बारे बेचने हैं और ग्राहकों का इंतजार करना है।
