प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 के बीच एक ऐसा मामला सुर्खियों में आया है जिसने धार्मिक आयोजनों से कहीं आगे सामाजिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है। माघ मेला जहां हर साल लाखों श्रद्धालु आने वाले होते हैं, वहीं इस बार संतोष दास उर्फ़ सतुआ बाबा ने अपनी अनोखी शैली और विवादित बयानों के कारण व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। संत परंपरा में साधु-संतों से आमतौर पर सादगी की उम्मीद की जाती है, लेकिन सतुआ बाबा ने इस धारणा को चुनौती देते हुए महंगी लग्ज़री कारों — जैसे लैंड रोवर डिफेंडर और पोरशे — के काफिले में चलते हुए विरोधियों को चेतावनी दी है कि यदि कोई सनातन धर्म की गति को रोकने की कोशिश करेगा, तो उसे इन गाड़ियों की रफ्तार से कुचल दिया जाएगा।
उनके इस बयान के साथ ही विवाद और तेज़ हो गया है। सतुआ बाबा ने मीडिया से स्पष्ट कहा है कि सनातन केवल धर्म नहीं है, बल्कि “अर्थ, शास्त्र, शस्त्र और रफ्तार का भी प्रतीक” है और उनका उद्देश्य किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि अपने धार्मिक “पड़ाव” तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि वह गाड़ियों के नाम या उनकी कीमत से अवगत नहीं हैं, और अगर लोग जानना चाहते हैं तो “गूगल बाबा हैं” देख लें। उनका कहना रहा कि गाड़ी का महँगा होना कोई मुद्दा नहीं है — मुद्दा लक्ष्य तक पहुंचने और सनातन का प्रसार करने का है।
सतुआ बाबा का यह बयान और उनके काफिले की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं — कुछ इसे हिंदू धर्म की शक्ति और आधुनिकता का प्रतीक बता रहे हैं, तो कई लोग इसे साधु-संत की परंपरा और सादगी के खिलाफ़ भी मान रहे हैं।
इस बीच, खबरों में यह भी बताया गया है कि सतुआ बाबा माघ मेले में अपनी जीवनशैली के चलते आकर्षण के केंद्र बन चुके हैं, जहां वे सिर्फ़ लग्ज़री गाड़ियों में ही नहीं, बल्कि कभी बुलडोज़र पर घूमते, कभी चार्टर प्लेन में सफ़र करते भी दिखाई दिए हैं।
उनकी टिप्पणी ने धार्मिक और सामाजिक विमर्श की सीमाओं को चुनौती दी है, और अब यह बहस धर्म, संस्कृति, आधुनिकता और परंपरा के बीच संतों की भूमिका और उनके जीवन के तरीक़ों पर केंद्रित हो गई है।
