मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा को लेकर कई अहम खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच क्राउन प्रिंस को भारी सुरक्षा वाले ऐसे महलों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां बंकर जैसी सुरक्षित सुविधाएं मौजूद हैं। उनकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।
इस घटनाक्रम के पीछे सऊदी राजधानी रियाद और उसके हवाई अड्डे को निशाना बनाकर किए गए हमलों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। हालिया हमले में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबर सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमले में ड्रोन के बाद बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि सऊदी अरब के पास मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार दबाव में है। लगातार हमलों के कारण देश को अपनी वायु रक्षा प्रणालियों और मिसाइल रक्षा बैटरियों को अलग-अलग रणनीतिक स्थानों पर तैनात करना पड़ रहा है। हालांकि, हथियारों के भंडार की वास्तविक स्थिति पर सऊदी सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सऊदी अरब के सामने चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उसका क्षेत्रफल काफी विशाल है और उसे एक साथ हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों, प्रमुख शहरों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करनी होती है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली होने के बावजूद इतने बड़े क्षेत्र को हर समय मिसाइल और ड्रोन हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रखना मुश्किल हो सकता है।
रियाद का हवाई अड्डा सऊदी अरब की आर्थिक योजनाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। देश की ‘विजन 2030’ योजना के तहत राजधानी को पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय कारोबार और वैश्विक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में हवाई अड्डे पर बार-बार होने वाले हमले केवल सुरक्षा की समस्या नहीं हैं, बल्कि निवेशकों के भरोसे, पर्यटन और हवाई यातायात पर भी असर डाल सकते हैं।
इस बीच, सऊदी अरब की चेतावनी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हालिया हमलों से पहले आम नागरिकों को मोबाइल फोन के जरिए मिलने वाली सार्वजनिक चेतावनियां जारी नहीं की गई थीं। अधिकारियों ने अब तक इस बारे में कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि चेतावनी प्रणाली से अलर्ट क्यों नहीं भेजे गए। इससे नागरिकों की सुरक्षा और आपातकालीन सूचना व्यवस्था पर बहस तेज हुई है।
हूती विद्रोहियों के हमलों में तेजी और सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव ने क्षेत्रीय संघर्ष को और गंभीर बना दिया है। फिलहाल क्राउन प्रिंस की सुरक्षा को लेकर सामने आई जानकारी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है, जबकि सऊदी सरकार की ओर से उनकी कथित आवाजाही और बंकरों में स्थानांतरण के बारे में विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सऊदी अरब अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने और लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए क्या कदम उठाता है।
