रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल की रूस को तनाव कम करने की अपील को खारिज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की करीब चार साल बाद आमने-सामने मुलाकात हुई। बातचीत में जर्मनी ने रूस से यूक्रेन युद्ध और यूरोप के साथ बढ़ते तनाव को लेकर अपना रुख बदलने की अपील की, लेकिन इसके बाद लावरोव ने जर्मनी पर ही यूक्रेन का प्रमुख समर्थक होने और यूरोप में सैन्य शक्ति बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
न्यूयॉर्क में हुई यह बैठक रूस के यूक्रेन पर 2022 में पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच पहली ऐसी बातचीत बताई जा रही है। जर्मन विदेश मंत्री वाडेफुल ने बैठक में रूस से जर्मनी, यूरोप और NATO के खिलाफ कथित तनाव बढ़ाने वाले कदमों को रोकने की अपील की। जर्मन पक्ष के मुताबिक उन्होंने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में वास्तविक इच्छा दिखाने को भी जरूरी बताया।
बैठक में ब्लैक सी के रास्ते अनाज निर्यात को लेकर भी चर्चा हुई। जर्मन पक्ष ने रूस से इस क्षेत्र में अनाज निर्यात को फिर से सुचारु करने के लिए समझौते की दिशा में कदम उठाने की अपील की। जर्मनी का कहना है कि खाद्य संकट का असर खास तौर पर ग्लोबल साउथ के कई देशों पर पड़ रहा है और ऐसे में सभी पक्षों को रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए।
बैठक के बाद लावरोव ने जर्मन विदेश मंत्री की अपील पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि बातचीत से कोई नई बात सामने नहीं आई और वाडेफुल ने रूस के खिलाफ जर्मनी के आधिकारिक रुख को ही दोहराया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान लावरोव ने जर्मनी पर यूक्रेन का मुख्य प्रायोजक होने का आरोप लगाया और कहा कि बर्लिन यूरोप में एक प्रमुख सैन्य शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लावरोव ने जर्मनी के रुख पर द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास का भी हवाला दिया और सवाल उठाया कि बर्लिन को मौजूदा दिशा के संभावित परिणामों का अंदाजा है या नहीं। उनके बयान में पश्चिमी देशों की नीतियों और यूरोप के सैन्यीकरण को लेकर रूस की पुरानी आपत्तियां भी दिखाई दीं। हालांकि जर्मनी का कहना है कि उसकी सुरक्षा नीति का उद्देश्य रूस से पैदा होने वाले खतरों से निपटना और यूक्रेन का समर्थन जारी रखना है।
रूस और जर्मनी के बीच तनाव हाल के हफ्तों में और बढ़ा है। जर्मन सरकार ने अगस्त में लीपजिग एयरपोर्ट से जुड़े ड्रोन हमले के प्रयास के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया था। मॉस्को ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें उकसावे वाला कदम बताया। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई राजनयिक कदम उठाए हैं।
जर्मनी की ओर से कहा गया है कि ऐसे कथित हाइब्रिड हमले और सुरक्षा संबंधी घटनाएं यूक्रेन को समर्थन देने के उसके रुख को नहीं बदलेंगी। जर्मन विदेश मंत्रालय के अनुसार, बर्लिन NATO और यूरोपीय संघ के सहयोगियों के साथ सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर समन्वय कर रहा है और यूक्रेन को नागरिक तथा सैन्य समर्थन जारी रखने की नीति पर कायम है।
दूसरी ओर, रूस लगातार पश्चिमी देशों पर यूक्रेन को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देकर संघर्ष को लंबा खींचने का आरोप लगाता रहा है। मॉस्को और बर्लिन के बीच इस मूलभूत मतभेद के कारण दोनों देशों के बीच संबंध फिलहाल बेहद तनावपूर्ण हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई यह बैठक हालांकि दोनों पक्षों के बीच सीधे संवाद का एक दुर्लभ अवसर रही, लेकिन सार्वजनिक बयानों से किसी बड़े नीतिगत बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं।
यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस, जर्मनी और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच मतभेदों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ब्लैक सी में व्यापार और अनाज आपूर्ति, यूरोपीय सुरक्षा और संभावित शांति वार्ता जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। फिलहाल लावरोव और वाडेफुल की बैठक से तत्काल किसी समझौते की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच बातचीत होना आने वाले समय में कूटनीतिक संपर्क के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
