
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच राजनीतिक टकराव फिर से सामने आ रहा है। थरूर ने हाल ही में केरल विधानसभा चुनावों से पहले होने वाली एक महत्वपूर्ण रणनीति बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष और मतभेद की चर्चाएँ तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि थरूर की पठारी बैठक में गैर-हाज़िरी का एक कारण राहुल गांधी से मिलने में विफलता और उनमें लगे सम्मान के अभाव को लेकर उनकी नाराज़गी है, खासकर तब जब कुछ कार्यक्रमों में उन्हें मंच पर उचित प्रोटोकॉल या सम्मान नहीं मिला।
थरूर की यह दूरी पार्टी के नेतृत्व के निर्णयों और उसकी रणनीतिक प्रक्रियाओं से असहमति की ओर भी इशारा करती है। कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि थरूर अपनी आवाज़ को पार्टी लाइन से अलग रखते हुए बयान देते रहे हैं और यह व्यवहार पार्टी में खिंचाव पैदा कर रहा है।
कांग्रेस के कुछ नेता जैसे संदीप दीक्षित ने भी थरूर पर कटाक्ष किया कि “उनके आने-नआने से कोई फर्क नहीं पड़ता,” जो पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और संवाद की कमी को दर्शाता है।
पार्टी आलाकमान ने अभी तक थरूर के खिलाफ किसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, जिससे राजनीतिक विश्लेषकों में यह सवाल उठा है कि कांग्रेस पार्टी वरिष्ठ नेता के साथ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही, खासकर तब जब मतभेद सार्वजनिक रूप से उभर रहे हैं।
इन विवादों से साफ दिखता है कि थरूर और कांग्रेसी नेतृत्व के बीच रणनीतिक निर्णयों, सम्मान और पार्टी लाइन का पालन जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं — यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव बार-बार मीडिया में उभर रहा है।



