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पैसों की लालच में ब्रिटिश दंपति की निर्मम हत्या, ISIS से जुड़े गिरोह ने मगरमच्छों से भरी नदी में फेंके शव

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दक्षिण अफ्रीका से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। ब्रिटेन के एक बुजुर्ग दंपति की कथित तौर पर ISIS से प्रेरित एक गिरोह ने अपहरण के बाद बेरहमी से हत्या कर दी और पहचान मिटाने के इरादे से उनके शव मगरमच्छों से भरी नदी में फेंक दिए। इस मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2018 में हुआ था, लेकिन हालिया फैसले के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

मृतकों की पहचान 74 वर्षीय रॉड सॉन्डर्स और 63 वर्षीय रैचेल सॉन्डर्स के रूप में हुई है। दोनों प्रसिद्ध वनस्पति विशेषज्ञ थे और दुर्लभ पौधों एवं बीजों की खोज के लिए दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलू-नटाल क्षेत्र के नगोये जंगल पहुंचे थे। जांच के दौरान सामने आया कि दंपति जंगल में कैंप लगाने की तैयारी कर रहा था, तभी हथियारबंद हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। आरोपियों ने उनसे बैंक खातों और एटीएम से जुड़ी जानकारियां हासिल करने के लिए उन्हें प्रताड़ित किया और बाद में उनकी हत्या कर दी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, हत्या के बाद आरोपियों ने दंपति के शवों को स्लीपिंग बैग में लपेटा और उन्हें मगरमच्छों से भरी नदी में फेंक दिया, ताकि सबूत नष्ट हो जाएं। कुछ दिनों बाद नदी के किनारे से क्षत-विक्षत अवशेष बरामद हुए, जिनकी पहचान डीएनए परीक्षण और दंत रिकॉर्ड के आधार पर की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पीड़ितों पर धारदार हथियारों और भारी वस्तुओं से कई बार हमला किया गया था।

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने हत्या के बाद दंपति के क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल कर बड़ी मात्रा में खरीदारी की थी। वित्तीय लेनदेन की इसी कड़ी ने जांच एजेंसियों को संदिग्धों तक पहुंचने में मदद की। पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से पीड़ितों का सामान, वाहन और कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री भी बरामद की। अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य आरोपी सायेफुंदीन डेल वेकियो, उसकी पत्नी और एक सहयोगी का संबंध ISIS समर्थित स्थानीय नेटवर्क से बताया गया है।

दक्षिण अफ्रीका की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोहरे हत्याकांड, अपहरण, लूटपाट और चोरी जैसे गंभीर अपराधों में दोषी करार दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने मजबूत थे कि उन्होंने अपराध की पूरी तस्वीर स्पष्ट कर दी। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कट्टरपंथी विचारधारा और आर्थिक लालच का मेल किस हद तक भयावह अपराधों को जन्म दे सकता है।

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