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चुनाव आयोग की SIR ड्राफ्ट रोल: पश्चिम बंगाल से लेकर राजस्थान, गोवा, पुदुचेरी व लक्षद्वीप तक 1 करोड़ से अधिक नाम हटे

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चुनाव आयोग ऑफ़ इंडिया (ECI) ने सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के तहत पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों — पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गोवा, पुदुचेरी और लक्षद्वीप — की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस ड्राफ्ट रोल में लगभग 1.02 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो SIR प्रक्रिया के दौरान गैर-सक्रिय, डुप्लिकेट, अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत पाए गए मतदाताओं के कारण सूची से बाहर किए गए हैं।

इस बड़े गणना में सबसे अधिक नाम पश्चिम बंगाल में हटाए गए, जहाँ 58,20,899 से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से हटाये गए हैं। बंगाल की स्थिति में मृत, स्थानांतरित या अन्य तकनीकी विसंगतियों के कारण ये कटौती हुई है। ड्राफ्ट लिस्ट में केवल वे नाम शामिल हैं जिन्होंने SIR के दौरान आवश्यक एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए हैं। इस सूची में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7 करोड़ 8 लाख है, जबकि इससे पहले लगभग 7 करोड़ 66 लाख नाम मौजूद थे।

राजस्थान में भी व्यापक कटौती हुई है जहाँ लगभग 42 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि राजस्थान में अधिकांश नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित या मृत पाए जाने के कारण हटाए गए हैं, और कुछ लोग डुप्लिकेट प्रविष्टियों के रूप में पाए गए थे। इन सभी का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और विश्वसनीय बनाना है।

छोटे प्रदेशों में भी कटौती का असर देखा गया है। गोवा में लगभग 1,00,042 नाम, पुदुचेरी में 1,03,467 नाम और लक्षद्वीप में 1,429 नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए हैं। इन नामों के हटने के पीछे भी समान कारण हैं — मृत, स्थानांतरित, या डुप्लिकेट मतदाता। इन क्षेत्रों में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के चलते कुछ नई बूथें भी स्थापित की गई हैं ताकि मतदाताओं के मताधिकार का संपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

चुनाव आयोग के अनुसार, ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन SIR प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसके बाद दावा और आपत्ति (Claims and Objections) की स्थिति शुरू हो जाएगी, जिसे मतदाता और राजनीतिक दल दोनों 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दर्ज करा सकते हैं। कोई भी वोटर जिनका नाम हटाया गया है या ASD (Absent, Shifted, Dead या Duplicate) में रखा गया है, वह आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपनी पात्रता प्रमाणित करा सकता है।

इस बड़े बदलाव से राजनीतिक चर्चा और मतदाता चिंता भी बढ़ी है। कुछ दलों और राजनीतिक संगठनों ने मतदाता सूची से नाम काटे जाने पर आपत्ति जताई है, जबकि आयोग का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए उठाया गया है। विपक्षी पार्टियों ने विशेषकर पश्चिम बंगाल में यह दावा किया है कि नामों की कटौती असंतुलित हुई है और इससे मतदाता भागीदारी प्रभावित हो सकती है।

ड्राफ्ट मतदाता सूची आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों से पहले जारी की गई है, विशेषकर पश्चिम बंगाल जहाँ 2026 में विधानसभा चुनाव होना है। विशेषज्ञों के अनुसार, SIR प्रक्रिया का यह चरण मतदाता पहचान, सूची की अद्यतनता और चुनावी निष्पक्षता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन व्यापक संख्या में नाम हटने से मतदाताओं के बीच जागरूकता और विश्वास दोनों की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।

इस प्रकार, SIR ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन और 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नामों का हटना देश के मतदाता सूची अद्यतन अभियान में एक अहम मोड़ साबित हुआ है, जिसका सीधा असर आगामी चुनाव प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक भागीदारी पर पड़ेगा।

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