भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 550 अंकों तक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी भारी दबाव में दिखाई दिया। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब निवेशकों को चौथी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों से बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India यानी SBI के तिमाही नतीजों ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।
SBI के शेयरों में शुक्रवार को जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। बैंक का मुनाफा सालाना आधार पर बढ़ा जरूर, लेकिन बाजार की उम्मीदों के मुकाबले प्रदर्शन कमजोर माना गया। सबसे ज्यादा चिंता ऑपरेटिंग प्रॉफिट में गिरावट और नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM के कम होने को लेकर रही। यही वजह रही कि SBI का शेयर कारोबार के दौरान लगभग 7% तक टूट गया, जो पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है। BSE Sensex और Nifty 50 में आई गिरावट का सबसे बड़ा असर बैंकिंग सेक्टर में दिखाई दिया।
SBI के साथ-साथ ICICI Bank, Axis Bank और अन्य बड़े बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा। निवेशकों को डर है कि अगर ब्याज मार्जिन पर दबाव बना रहा तो आने वाली तिमाहियों में बैंकिंग सेक्टर की कमाई प्रभावित हो सकती है। इस गिरावट के पीछे सिर्फ SBI के नतीजे ही जिम्मेदार नहीं रहे, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों ने भी बाजार को प्रभावित किया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई। पिछले कुछ दिनों से विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में हाल की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली भी शुरू कर दी, जिससे गिरावट और तेज हो गई। हालांकि बाजार की इस कमजोरी के बीच कुछ सेक्टरों ने मजबूती भी दिखाई। ऑटो सेक्टर में Mahindra & Mahindra और Bajaj Auto जैसे शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली।
इसके अलावा कुछ आईटी कंपनियों में भी खरीदारी बनी रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं हुए हैं बल्कि चुनिंदा सेक्टरों में अभी भी भरोसा कायम है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी मजबूत बनी हुई है और यह गिरावट फिलहाल एक सामान्य करेक्शन की तरह देखी जा रही है। लेकिन अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अब रिजर्व बैंक की नीतियों, विदेशी निवेशकों के रुख और कंपनियों के अगले तिमाही नतीजों पर टिकी रहेगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह गिरावट नए निवेश के अवसर भी पैदा कर सकती है। हालांकि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।
