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हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट पर अमेरिका का बड़ा बयान, भारत समेत दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर मंडराया खतरा

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मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक राह माने जाने वाले हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संकट गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे पर नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में अमेरिकी प्रतिनिधि सर्जियो गोर ने कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिका की प्राथमिकता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुला रखना है। उन्होंने माना कि ईरान के साथ टकराव के चलते इस समुद्री मार्ग से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ी है।

दरअसल, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से हर दिन वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। हाल के दिनों में अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। इसके चलते कई जहाजों पर हमले हुए और तेल टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट आई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

कॉन्क्लेव में बोलते हुए सर्जियो गोर ने संकेत दिया कि अमेरिका इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका की प्राथमिकता यह है कि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो और वैश्विक व्यापार पर संकट न आए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारत जैसे प्रमुख साझेदार देशों के साथ लगातार संवाद में है, क्योंकि एशिया के कई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर करती हैं।

इस संकट का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है बल्कि भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और उन तेल टैंकरों का बड़ा भाग इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक असुरक्षित रहता है या बंद हो जाता है तो तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सप्लाई संकट की आशंका बढ़ सकती है।

उधर, ईरान की ओर से भी बयान सामने आए हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता का सम्मान करता है, हालांकि उसने क्षेत्र में बढ़ते तनाव के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। इस बीच कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत तेज कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है तो यह केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गहरा असर डाल सकता है। इसलिए दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर कोई समाधान निकलता है या यह संकट और गहराता है।

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