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सुल्तानपुर के सीएमएस डॉ. भास्कर प्रसाद का विवादित बयान—‘योगी सरकार की अर्थी निकालो’ कहने पर निलंबन, मुकदमा दर्ज

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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर ज़िले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। जिले के बिरसिंहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. भास्कर प्रसाद को राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ अनुशासनहीनता और सरकारी पद की गरिमा के विपरीत बयान देने का आरोप लगा है।

पूरा मामला तब सामने आया जब डॉ. भास्कर प्रसाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वे एक धरना प्रदर्शन के दौरान बेहद तीखे और विवादित शब्दों का प्रयोग करते हुए नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा—

“मेरी या CMO की अर्थी क्यों निकालोगे, सरकार और योगी की निकालो।”

यह बयान वायरल होते ही हड़कंप मच गया। भाजपा नेताओं ने इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अशोभनीय और अपमानजनक टिप्पणी बताया। इसके बाद स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस घटना की सूचना लखनऊ भेजी।

मुख्यमंत्री कार्यालय से मामले की रिपोर्ट तलब की गई और देर शाम स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. भास्कर प्रसाद को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
इसके साथ ही जयसिंहपुर थाने में भाजपा मंडल अध्यक्ष की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में कहा गया है कि डॉ. भास्कर प्रसाद ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर जनता में सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश की।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, डॉ. भास्कर प्रसाद पिछले कुछ समय से अस्पताल में दवाओं की कमी, सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों की लापरवाही को लेकर नाराज़ थे। उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों को शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने धरना आयोजित किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने यह विवादित बयान दे दिया, जो बाद में उनके लिए भारी पड़ गया।

जिले के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है। समिति यह जांच करेगी कि बयान के पीछे उनकी मंशा क्या थी और क्या वास्तव में यह किसी राजनीतिक उद्देश्य से दिया गया था।

वहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि “सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह न केवल मुख्यमंत्री का अपमान है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे के खिलाफ विद्रोही बयान है।”

दूसरी ओर, कुछ डॉक्टर संघों और कर्मचारियों का कहना है कि डॉ. भास्कर का बयान भले अनुचित रहा हो, लेकिन उनकी अस्पताल में संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की बदतर स्थिति को लेकर की गई शिकायतें भी गंभीर हैं। उनका कहना है कि सरकार को केवल दंडात्मक कार्रवाई न कर, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

वर्तमान में डॉ. भास्कर प्रसाद निलंबित हैं और मामले की जांच जारी है। पुलिस ने उनके बयान के वीडियो को साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है और डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है।

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