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हेट स्पीच मामले में अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिका भी की खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित हेट स्पीच से जुड़े मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दायर समीक्षा याचिका (रिव्यू पिटीशन) खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने अपने पहले दिए गए फैसले में किसी भी प्रकार की स्पष्ट त्रुटि नहीं पाई और कहा कि मामले पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही अदालत का पूर्व निर्णय बरकरार रहा, जिसमें दोनों नेताओं के खिलाफ संज्ञेय अपराध का मामला नहीं बनने की बात कही गई थी।

यह मामला उस समय शुरू हुआ था जब माकपा नेता बृंदा करात ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के चुनावी भाषणों को सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाला बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। आरोप था कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए कुछ भाषणों और नारों से समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया। ट्रायल कोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की मांग खारिज किए जाने के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जहां भी राहत नहीं मिली। इसके बाद बृंदा करात ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अप्रैल 2026 के फैसले में यह स्पष्ट किया था कि मजिस्ट्रेट द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के तहत जांच के आदेश देने से पहले धारा 196 के तहत पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं है। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों का परीक्षण करते हुए यह भी माना था कि संबंधित भाषणों के आधार पर संज्ञेय अपराध का मामला नहीं बनता। अदालत ने कहा था कि भाषणों में किसी विशेष समुदाय को प्रत्यक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया गया था, इसलिए हेट स्पीच से संबंधित आपराधिक धाराएं लागू नहीं होतीं।

बाद में बृंदा करात ने समीक्षा याचिका दायर करते हुए तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर विस्तार से सुनवाई किए बिना ही यह निष्कर्ष निकाल लिया कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। याचिका में कहा गया कि निचली अदालतों ने भी इस पहलू पर विस्तृत विचार नहीं किया था, इसलिए शीर्ष अदालत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि पूर्व आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है, जिसके आधार पर समीक्षा की जाए।

समीक्षा याचिका खारिज होने के साथ ही अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ इस मामले में कानूनी चुनौती का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, चुनावी भाषणों की सीमाओं और हेट स्पीच कानूनों की व्याख्या को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई और कानूनी मानकों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

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