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सुप्रीम कोर्ट ने POCSO में ‘रोमियो-जूलिएट क्लॉज’ जोड़ने को कहा, ताकि वास्तविक किशोर रिश्तों को बचाया जा सके

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सुप्रीम कोर्ट ने बच्‍चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाला POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) कानून के दुरुपयोग को रोकने और सच्चे किशोर-किशोरी के आपसी सहमति वाले रिश्तों को बचाने के लिए केंद्र सरकार से ‘रोमियो-जूलिएट क्लॉज’ शामिल करने का सुझाव दिया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि POCSO के कठोर प्रावधान के कारण कई मामलों में किशोरों के आपसी सहमति वाले रिश्तों को क्रिमिनल फेरे में डाल दिया जाता है, जबकि उनका उद्देश्य वह नहीं होता। इसीलिए ‘रोमियो-जूलिएट क्लॉज’ लागू करने से ऐसे वास्तविक प्रेम-संबंधों को कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, जब उम्र में करीब-करीब किशोर आपसी सहमति से जुड़े हों।

इस क्लॉज का मूल उद्देश्य यही है कि अगर दो किशोर (जैसे 17 साल की लड़की और 18 साल का लड़का) सहमति से रिश्ते में हैं, तो ऐसे मामलों में कानून अधिक कड़ा न हो और व्यक्तिगत आज़ादी को सम्मान मिले। हालांकि अगर जबरदस्ती, बड़ा आयु अंतर या दुराग्रह जैसे तत्व हों तो कानून अपना असर दिखाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश से जुड़े एक मामले में की, जहां हाई कोर्ट ने नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामले में आरोपी को जमानत दी थी। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत के चरण में पीड़ित की मेडिकल उम्र निर्धारण को अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए।

इस निर्णय को न्याय-संगत व्यवहार सुनिश्चित करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है, ताकि किशोरों के वास्तविक रिश्तों पर गलत तरीके से आपराधिक धाराएँ लागू न हों और कानून का दुरुपयोग रोका जा सके।

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