पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है और इसी के साथ राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।
शपथ ग्रहण समारोह में हजारों की संख्या में भाजपा समर्थक पहुंचे। पूरे मैदान में “जय श्रीराम” और “परिवर्तन” के नारे गूंजते रहे। सुवेंदु अधिकारी ने बंगाली भाषा में शपथ लेते हुए राज्य में विकास, बेहतर कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का संकल्प लिया। मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता की ओर हाथ जोड़कर अभिवादन किया और इसे “जनशक्ति की जीत” बताया। ब्रिगेड परेड ग्राउंड को इस समारोह के लिए चुनना भी राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। यह वही मैदान है जिसने दशकों तक बंगाल की बड़ी राजनीतिक रैलियों और सत्ता परिवर्तन की कहानियों को देखा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने इस ऐतिहासिक स्थल के जरिए बंगाल में अपने राजनीतिक प्रभाव और स्थायी उपस्थिति का संदेश देने की कोशिश की है। समारोह के दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानी माखन लाल सरकार के पैर छुए, उन्हें गले लगाया और सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया।
इस दृश्य को भाजपा नेताओं ने पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पल का तालियों के साथ स्वागत किया। नई सरकार के साथ कई मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और क्षुदिराम टुडू जैसे नेता शामिल रहे। भाजपा ने अपने शुरुआती मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है ताकि राज्य के अलग-अलग हिस्सों और समुदायों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल का और विस्तार हो सकता है। सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा भी काफी चर्चा में रही है। कभी तृणमूल कांग्रेस के मजबूत नेता रहे अधिकारी ने नंदीग्राम आंदोलन से अपनी अलग पहचान बनाई थी। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और धीरे-धीरे पार्टी के सबसे बड़े बंगाली चेहरों में शामिल हो गए। 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया और तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन का अंत कर दिया।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल में भाजपा सरकार का गठन राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व वाले राज्य में भाजपा का सत्ता तक पहुंचना भारतीय राजनीति के बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई सरकार अपने चुनावी वादों को किस तरह लागू करती है और बंगाल की राजनीति आने वाले वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ती है।
