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सीरिया में इजरायली एयरस्ट्राइक से तुर्की भड़का, बैकडोर बातचीत से टकराव टालने की कोशिश

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सीरिया को लेकर तुर्की और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इजरायल की एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच सीधे टकराव की आशंका बढ़ी, लेकिन इसी बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी खुला हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने संकेत दिया है कि तुर्की के साथ तनाव बढ़ाने की उसकी मंशा नहीं है और दोनों देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान के लिए बैकचैनल अभी भी सक्रिय हैं।

तनाव की बड़ी वजह 18 अगस्त को सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हुई इजरायली एयरस्ट्राइक है। इजरायल ने एयरबेस के रनवे और स्टोरेज सुविधाओं को निशाना बनाकर 8 हवाई हमले किए थे। यह एयरबेस तुर्की की सीमा से करीब 70 किलोमीटर दूर है। इजरायल ने अपनी कार्रवाई को सीरिया में संभावित तुर्की सैन्य तैनाती से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के आधार पर सही ठहराया, जबकि तुर्की ने इस हमले की आलोचना करते हुए इसे सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया।

इस हमले के बाद तुर्की और इजरायल के बीच तनाव काफी बढ़ गया। तुर्की सीरिया की नई सरकार का महत्वपूर्ण समर्थक है और वहां उसका सैन्य प्रभाव भी है। दूसरी ओर इजरायल सीरिया में तुर्की के बढ़ते प्रभाव और संभावित सैन्य ढांचे को अपने लिए रणनीतिक खतरे के तौर पर देख रहा है। अबू अल-दुहूर एयरबेस की भौगोलिक स्थिति भी बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह तुर्की सीमा के काफी करीब है।

हालांकि, सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते बंद नहीं हुए हैं। इजरायली सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक तुर्की के साथ गुप्त संपर्क के चैनल अभी भी खुले हैं। इन चैनलों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच गलतफहमी को बढ़ने से रोकना और सीधे सैन्य टकराव की स्थिति पैदा होने से बचाना है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष सार्वजनिक बयानबाजी के बावजूद पर्दे के पीछे संवाद बनाए रखना चाहते हैं।

इसी बीच सीरिया और इजरायल के बीच भी उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शैबानी और इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख रोमन गोफमैन के बीच जॉर्डन में बातचीत हुई। इसका मुख्य उद्देश्य हालिया तनाव को कम करना, इजरायली हमलों को रोकने की संभावनाएं तलाशना और दोनों देशों के बीच पहले से चल रही सुरक्षा वार्ता को फिर से आगे बढ़ाना बताया गया है।

सीरिया का कहना है कि वह अपनी जमीन पर किसी स्थायी तुर्की सैन्य अड्डे की योजना नहीं बना रहा था। सीरियाई विदेश मंत्री ने एयरबेस पर इजरायल के हमले को अनुचित बताया था और कहा था कि सीरिया ने पहले ही इजरायल को अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। वहीं इजरायल का दावा है कि उसे सीरिया में तुर्की की संभावित सैन्य गतिविधियों को लेकर विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी। इस दावे और हमले को लेकर अमेरिका के विशेष दूत टॉम बैरक ने भी सवाल उठाए हैं।

अमेरिका की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिका दोनों सहयोगी देशों के बीच तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि तुर्की और इजरायल के बीच सीरिया को लेकर सीधा टकराव पूरे मध्य पूर्व की स्थिति को और अस्थिर कर सकता है। अमेरिका के विशेष दूत ने एयरस्ट्राइक को लेकर चिंता जताई है और संकेत दिया है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से तुर्की के साथ गंभीर टकराव का खतरा बढ़ सकता है।

फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ सीरिया में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और तुर्की की बढ़ती भूमिका के कारण तनाव बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल-तुर्की और सीरिया-इजरायल के बीच बैकचैनल बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने की कोशिश भी जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये गुप्त कूटनीतिक संपर्क तनाव कम करने में कितने सफल होते हैं या सीरिया की वजह से इजरायल और तुर्की के बीच रणनीतिक टकराव और गहरा होता है।

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