तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है। विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी हुई है। लेकिन राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने विजय से साफ तौर पर कहा है कि पहले वे 118 विधायकों का समर्थन साबित करें, तभी सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। यह पार्टी का पहला विधानसभा चुनाव था और इतने बड़े प्रदर्शन ने राज्य की पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। पिछले लगभग छह दशकों से तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही थी, लेकिन इस बार विजय की एंट्री ने पूरा समीकरण बदल दिया। सरकार बनाने के लिए विजय लगातार समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा वामपंथी दलों और VCK ने भी विजय के पक्ष में खुलकर समर्थन दिया है। इन दलों के समर्थन के बाद TVK का आंकड़ा 118 तक पहुंचता दिखाई दे रहा है, जिससे सरकार गठन की राह आसान होती नजर आ रही है।
हालांकि राजनीतिक संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्यपाल ने विजय को दूसरी बार भी बहुमत साबित करने के लिए वापस भेज दिया। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने कहा कि केवल मौखिक समर्थन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि 118 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ समर्थन पत्र देना होगा। इसके बाद ही शपथ ग्रहण समारोह की अनुमति दी जाएगी।
इस बीच DMK और AIADMK भी राजनीतिक समीकरण बनाने में जुटे हुए हैं। खबरें हैं कि दोनों दल किसी तरह TVK को सत्ता में आने से रोकने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी वजह से तमिलनाडु में राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। TVK नेताओं ने यहां तक चेतावनी दे दी है कि अगर DMK और AIADMK मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करते हैं तो पार्टी के सभी विधायक इस्तीफा दे सकते हैं। राज्यपाल की भूमिका को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार गठन में जानबूझकर देरी की जा रही है।
कांग्रेस और वामपंथी दलों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। वहीं BJP नेताओं का कहना है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत स्थिर सरकार सुनिश्चित करना जरूरी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने अपने पहले ही चुनाव में जिस तरह की सफलता हासिल की है, उसने तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है। युवा मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले वर्ग में विजय की लोकप्रियता काफी ज्यादा देखी गई।
चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने रोजगार, भ्रष्टाचार विरोध और नई राजनीति जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बन पाएंगे या फिर राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी। अगर TVK सरकार बनाने में सफल होती है तो यह दक्षिण भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा।
