अमेरिका और भारत के बीच दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता (India-US trade deal) को लेकर चल रही बातचीतों में अचानक राजनीतिक तूफान उठ गया है। टेक्सास के रिपब्लिकन सिनेटर टेड क्रूज़ (Ted Cruz) की एक लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग ने इस विवाद को हवा दे दी है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump), उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो (Peter Navarro) को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को “ब्लॉक/रोकने” का आरोप लगाया है। यह आरोप अमेरिकी प्रशासन के भीतर आंतरिक मतभेद और रणनीतिक विचारों के टकराव को रेखांकित करता है।
लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग, जिसे एक रिपब्लिकन स्रोत ने Axios को दी थी, करीब 10 मिनट की बातचीत का हिस्सा है। इसमें क्रूज़ निजी दानदाताओं से बात कर रहे हैं और कहते सुने जाते हैं कि उन्होंने “व्हाइट हाउस के भीतर व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष” किया है, लेकिन नवारो और वेंस ने इसे रोक दिया और कभी-कभी तो ट्रंप ने भी विरोध किया। यह संवाद 2025 की शुरुआत तथा मध्य समय में रिकॉर्ड किया गया था, जब अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में तेजी आए जाने की संभावना थी।
टेड क्रूज़ की ओर से उठाए गए आरोप न सिर्फ व्यापार समझौते पर प्रभाव डाल रहे हैं, बल्कि ट्रम्प प्रशासन की नीति को भी सवालों के घेरे में ला रहे हैं। क्रूज़ ने विशेष रूप से ट्रंप के टैरिफ (tariff)-आधारित आर्थिक नीति की तीखी आलोचना की और कहा कि ये नीतियाँ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकती हैं तथा घरेलू स्तर पर कीमतों को बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर इन नीतियों का असर अब भी जारी रहा, तो चुनावों में इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच बिलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है और 2025 से इसके मसौदे पर चर्चा चल रही है। व्यापार वार्ता का मकसद टैरिफ को कम करना, बाज़ारों तक पहुंच बढ़ाना और निवेश को सुविधाजनक बनाना था, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ हो सके। हालांकि अमेरिका की कुछ नीतियों ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया है।
इसके बावजूद, **डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में विश्व आर्थिक फोरम के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि “भारत और अमेरिका के बीच एक अच्छा समझौता होने वाला है”, जिससे एक सकारात्मक संकेत भी मिला है। लेकिन क्रूज़ की लीक रिकॉर्डिंग में सामने आए मतभेद स्पष्ट करते हैं कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर राजनीतिक और आर्थिक विचारों में गहरा उलझाव है।
यह मामला न सिर्फ व्यापार और आर्थिक रिश्तों से जुड़ा है, बल्कि वैश्विक कूटनीति और द्विपक्षीय रणनीतियों को भी प्रभावित कर रहा है। अगर अमेरिका के भीतर मतभेद जारी रहते हैं, तो इससे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर असर पड़ सकता है और यह मुद्दा आगामी चुनावों एवं दोनों देशों की नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभा सकता है।
