Site icon Prsd News

जीते-जी अपनी कब्र खुद बनवाने वाले 80 वर्षीय तेलंगाना के इंद्रय्या का निधन, आखिरी इच्छा के अनुसार दफ़नाया गया

download 23

तेलंगाना के लक्ष्मीपुरम गांव से एक बेहद अनोखी और भावनात्मक ख़बर सामने आई है, जिसने न केवल राज्य बल्कि देश भर में लोगों को हैरान और प्रभावित कर दिया है। 80 वर्षीय नक्का इंद्रय्या जिन्होंने जीते-जी अपनी कब्र खुद बनवाई थी, अब अपनी आखिरी सांस भी ली है और उन्हें उसी कब्र में दफ़नाया गया है जिसे उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिनों में खुद बनवाया था।

यह कहानी शुरुआत में इसलिए सुर्खियों में आई थी क्योंकि इंद्रय्या ने अपनी मौत से पहले ही अपनी अंतिम आरामगाह तैयार कर ली थी। उन्होंने यह कब्र अपनी पत्नी की कब्र के ठीक पास बनवाई थी ताकि उनके मरने के बाद उन्हें वहीं फैंसी दुनिया से विदा किया जाए। उन्होंने अपने बच्चों से भी यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि उनका दफ़न इसी खुद करवाए गए स्थान पर ही किया जाए, ताकि उनके जाने के बाद परिवार पर किसी भी तरह का बोझ न पड़े।

इंद्रय्या ने अपनी कब्र को ग्रेनाइट पत्थर से तैयार करवाया था, जिसकी लंबाई लगभग 6 फीट से अधिक और गहराई लगभग 5 फीट थी। यह कब्र विशेष रूप से इस तरह से बनाई गई थी कि वह लंबे समय तक सुरक्षित रहे, और इसके लिए उन्होंने करीब 12 लाख रुपये की राशि खर्च की थी। इस निर्माण में तमिलनाडु के एक अनुभवी राजमिस्त्री की मदद भी ली गई थी।

उन्होंने नियमित रूप से उस स्थान पर जाकर अपने हाथ से लगाई गई पौधों की देखभाल की, सफ़ाई की, और उस जगह पर कुछ समय बिताया करता था। उनके इस कदम को अपने बच्चों और परिवार पर बोझ न बनने की गंभीर भावनात्मक सोच के तौर पर भी देखा गया। वो अपने जीवन के अंतिम सफर के लिए पहले से तैयार रहना चाहते थे, यह सोच कई लोगों को प्रेरणादायक लगी, वहीं कुछ इसे अतिविचित्र भी मान रहे थे।

मज़हबी, सांस्कृतिक या व्यक्तिगत विश्वास जो भी हों, इंद्रय्या का यह कदम यह याद दिलाता है कि मृत्यु और जीवन की अस्थिरता से इंसान कितनी गहराई से जुड़ा रहता है। इंसान चाहे जितनी भी दौलत या संपत्ति एकत्र कर ले, मौत एक निश्चित और अपरिहार्य सत्य है, और इसे स्वीकार करने के तरीके हर व्यक्ति अलग-अलग हो सकते हैं।

इंद्रय्या के निधन पर गांव के लोगों ने उन्हें एक ज़िम्मेदार, दयालु और निरपेक्ष इंसान के रूप में याद किया, जिन्होंने जीवन में कई सामाजिक कार्य भी किए थे, जैसे घर, स्कूल और चर्च बनवाना। उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक ही उन्हें उसी कब्र में दफ़नाया गया, जिसे उन्होंने अपनी सोच और निर्णय के साथ तैयार किया था। इस अद्भुत और संवेदनशील कहानी ने लोगों को जीवन, मृत्यु और जिम्मेदारी के बारे में गहरी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

Exit mobile version