पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंचने के बाद एक अहम मोड़ पर आ गया है। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यह व्यवस्था आगामी नंदीग्राम और रेज़ीनगर विधानसभा उपचुनावों के लिए लागू होगी। आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे हैं।
मामले में एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी से जुड़े धड़े के पास है। दोनों पक्ष पार्टी के संगठन, नेतृत्व और आधिकारिक नाम-चिन्ह पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि पार्टी के वास्तविक संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है और इसी प्रक्रिया के दौरान अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।
दोनों गुटों से मांगे गए तीन-तीन नाम और चुनाव चिन्ह
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा था। आयोग इनमें से एक नाम और एक चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा, ताकि आगामी उपचुनावों में दोनों गुट अलग-अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ सकें। दोनों पक्षों को अपने प्रस्तावित नामों में मूल पार्टी से संबंध का उल्लेख करने की अनुमति भी दी गई है।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 1998 में पार्टी के गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह दोनों गुटों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेज़ीनगर में उपचुनाव होने हैं, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
रितब्रत बनर्जी गुट का क्या है दावा?
रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े का कहना है कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और राष्ट्रीय कार्यसमिति की वैधता को लेकर गंभीर सवाल हैं। इस गुट के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2025 में समाप्त हो गया था और इसके बाद पार्टी के संगठनात्मक मामलों को लेकर विशेष बैठक बुलाकर नए पदाधिकारियों का चुनाव किया गया।
रितब्रत गुट की ओर से अरूप रॉय को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति का अध्यक्ष बनाए जाने का दावा किया गया है। इस गुट ने चुनाव आयोग के सामने अपने संगठनात्मक दस्तावेज और पदाधिकारियों से जुड़े कागजात भी पेश किए हैं। हालांकि, ममता बनर्जी गुट इस पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाता रहा है।
ममता गुट ने आदेश पर जताई आपत्ति
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। गुट की ओर से कहा गया है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर आयोग का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है। वहीं, रितब्रत गुट ने अंतरिम आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि वह आयोग की व्यवस्था का पालन करेगा। दोनों पक्षों के रुख में अंतर के बावजूद अंतिम निर्णय अभी चुनाव आयोग के पास लंबित है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, राष्ट्रीय कार्यसमिति और नेतृत्व को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों से हुई। इसके बाद मामला पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर अधिकार तक पहुंच गया। अब चुनाव आयोग के अंतिम फैसले पर यह निर्भर करेगा कि आगे किस गुट को मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर अधिकार मिलता है।
