
देश की प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता विजय हज़ारे ट्रॉफी 2025-26 में दिल्ली टीम ने सौराष्ट्र के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की, लेकिन टीम के कप्तान ऋषभ पंत का प्रदर्शन फिर से निराशाजनक रहा है। बेंगलुरु में हुए ग्रुप-डी मैच में सौराष्ट्र ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ी साझेदारियों के दम पर 320 रन का विशाल स्कोर बनाया, जिसे लक्ष्य के रूप में जवाब देते हुए दिल्ली ने 49वें ओवर में तीन विकेट से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ दिल्ली ने लगातार तीन मैचों में जीत हासिल की और पॉइंट्स टेबल में शीर्ष स्थान पर अपना कब्ज़ा मजबूत किया।
दिल्ली की टीम इस मैच में विराट कोहली के बिना उतरी, जो पहले दो मैचों में शानदार बल्लेबाज़ी कर चुके थे, लेकिन इस मुकाबले में आराम दिया गया था। बावजूद इसके दिल्ली ने लक्ष्य का पीछा करते हुए मैच जीत लिया, जिसमें प्रियांश आर्य ने तूफानी 78 रन और नवदीप सैनी ने गेंदबाज़ी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
हालांकि टीम की जीत की कहानी में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा ऋषभ पंत का खराब प्रदर्शन। उन्होंने महज़ 22 रन बनाए और जल्दी पवेलियन लौट गए, जिससे दिल्ली को एक समय हार की ओर धकेल दिया गया था। उनकी इस खराब पारी को देखते हुए आलोचना तेज़ हो रही है कि क्या पंत एक बार फिर से वनडे क्रिकेट में अपने शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन कर पाएंगे या नहीं।
दिल्ली के लिए ये मैच इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उम्मीदें विराट कोहली और ऋषभ पंत जैसे अनुभवी खिलाड़ियों से थीं, लेकिन कोहली के न खेलने के बावजूद टीम ने संतुलित प्रदर्शन के दम पर जीत हासिल की। प्रियांश आर्य के अलावा तेज़स्वी दहिया और हर्ष त्यागी ने भी मध्यक्रम में जिम्मेदार रन बनाए, जिससे लक्ष्य का पीछा आसान हुआ। नवदीप सैनी ने गेंदबाज़ी में अपने 10 ओवरों में तीन महत्वपूर्ण विकेट लेकर सौराष्ट्र की मजबूत शुरुआत को रोक दिया।
पंत की खराब लय पहले भी इस टूर्नामेंट में देखी गई है, जहां उन्होंने पिछले मैचों में केवल सीमित रन बनाए हैं और अब चयनकर्ताओं के समक्ष सवाल उठ रहे हैं कि क्या पंत को भारतीय वनडे टीम में वापस बुलाने का विचार सही है या नहीं। इसके विपरीत, कुछ मैचों में उन्होंने 70 के आसपास रन बनाकर अच्छा संकेत दिया है, लेकिन निरंतरता का अभाव उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े करता है।
इस जीत के बावजूद, दिल्ली टीम की निगाहें अभी आगे है क्योंकि कोहली संभवत: जनवरी 2026 में आगामी मैच में वापसी कर सकते हैं, जिससे टीम की बल्लेबाज़ी और भी सुदृढ़ हो सकती है। विजय हज़ारे ट्रॉफी में दिल्ली की यह जीत उनकी संतुलित टीम रणनीति और खिलाड़ियों के विविध योगदान का परिणाम भी है।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यह टूर्नामेंट घरेलू प्रतिभाओं के लिए बड़े मंच के रूप में काम कर रहा है, जहाँ कुछ युवा खिलाड़ियों ने अपनी अलग पहचान बनाई है, और पंत जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी अपनी फॉर्म को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। विजय हज़ारे ट्रॉफी में इस तरह के प्रदर्शन निश्चित तौर पर चयन अभियानों पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।



