अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बड़े कूटनीतिक समझौते की रूपरेखा सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तय हो चुका है, जिसके तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। इस समझौते को मध्य पूर्व में शांति बहाली और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में ईरान ने यह आश्वासन देने पर सहमति जताई है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके बदले अमेरिका कुछ आर्थिक रियायतें देने, प्रतिबंधों में चरणबद्ध ढील देने और ईरान की जमी हुई वित्तीय संपत्तियों को आंशिक रूप से जारी करने पर विचार कर सकता है। समझौते के मसौदे में यह भी शामिल है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल प्रभाव से जहाजों के लिए सुरक्षित बनाया जाएगा और समुद्री यातायात को सामान्य स्थिति में लाने के लिए दोनों पक्ष सहयोग करेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। पिछले महीनों में क्षेत्रीय संघर्ष और सैन्य तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। अब यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद है और ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया भी देखी गई, जहां तेल की कीमतों में गिरावट और शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई।
रिपोर्टों के मुताबिक समझौते में 60 दिनों के युद्धविराम और आगे की वार्ताओं का भी प्रावधान है। इस अवधि में दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे जटिल मुद्दों पर विस्तृत बातचीत करेंगे। हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि अभी भी कई संवेदनशील विषयों पर अंतिम सहमति बनना बाकी है और समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपने-अपने वादों का कितना पालन करते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच यह संभावित समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बनी हुई है। कुछ देशों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने समझौते का स्वागत किया है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे ईरान को आर्थिक लाभ तो मिलेगा लेकिन उसके क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा गतिविधियों को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। वहीं ईरान की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि अंतिम और व्यापक समझौते के लिए आगे विस्तृत वार्ता जरूरी होगी तथा वाशिंगटन के प्रति उसका अविश्वास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
यदि आने वाले दिनों में यह समझौता औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित हो जाता है तो इसे हाल के वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में गिना जाएगा। इससे न केवल दोनों देशों के संबंधों में नई शुरुआत हो सकती है बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है।
