मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी और सहयोगी देशों की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के कई अहम सैन्य ठिकाने और क्षमताएं लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, इसलिए अब संघर्ष अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अगर वह चाहें तो यह युद्ध बहुत जल्द समाप्त हो सकता है।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान में अब “लगभग कुछ भी निशाना बनाने के लिए बाकी नहीं बचा है”, क्योंकि पिछले कई दिनों में लगातार हवाई हमलों और सैन्य अभियानों के जरिए बड़ी संख्या में रणनीतिक ठिकानों को तबाह कर दिया गया है। उनके अनुसार अमेरिकी सैन्य अभियान उम्मीद से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ा है और लक्ष्य काफी हद तक हासिल कर लिए गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका आगे भी कुछ महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला कर सकता है।
मध्य पूर्व में यह युद्ध फरवरी 2026 के अंत में उस समय भड़क गया था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर संयुक्त हमले किए। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए क्षेत्र के कई देशों और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी इसका असर पड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार इस युद्ध के दौरान दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले जारी हैं और कई देशों ने अपने नागरिकों को मध्य पूर्व से निकालना शुरू कर दिया है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हालात अभी भी जटिल हैं और युद्ध के तुरंत समाप्त होने की कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है, भले ही ट्रंप इसे जल्द खत्म होने की बात कह रहे हों।
इस बीच युद्ध के चलते ऊर्जा बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों पर खतरा बढ़ गया है। यही कारण है कि कई देश और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां तेल आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए रणनीति बना रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा और अंतरराष्ट्रीय दबाव यह तय करेगा कि यह संघर्ष वास्तव में कब और कैसे समाप्त होगा।
