अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच परमाणु हमले को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने आरोप लगाया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ परमाणु हमला करने का दबाव बना रहे हैं। कार्लसन का दावा है कि अमेरिकी प्रशासन आने वाले कुछ दिनों में इस विकल्प पर फैसला कर सकता है। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी सरकार की ओर से ईरान पर परमाणु हमला करने का कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है।
कार्लसन ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट में दावा किया कि संभावित हमले का निशाना मध्य ईरान में स्थित पिकैक्स माउंटेन हो सकता है। उनके मुताबिक, इस पहाड़ी के नीचे ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़े भूमिगत ठिकाने मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली खुफिया एजेंसियों को संदेह है कि ईरान ने वहां यूरेनियम संवर्धन का काम फिर से शुरू कर दिया है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक रूप से सत्यापित सबूत पेश नहीं किया।
कार्लसन का कहना है कि पिकैक्स माउंटेन के नीचे मौजूद सुरंगें और ठिकाने ग्रेनाइट की मोटी चट्टानों से सुरक्षित हैं। उनके दावे के मुताबिक, अमेरिका के पारंपरिक हथियार इन ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम नहीं होंगे और इसलिए परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का विकल्प सामने आ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू इस तरह की कार्रवाई के लिए लगातार ट्रंप से संपर्क कर रहे हैं। कार्लसन ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से दावा किया कि नेतन्याहू इस मुद्दे पर ट्रंप को रोज फोन करते हैं।
कार्लसन ने इस कथित दबाव को इजरायल की घरेलू राजनीति से भी जोड़ा है। उनका दावा है कि हालिया चुनाव के बाद नेतन्याहू के सामने सरकार बनाने की चुनौती है और सत्ता से बाहर होने पर उन्हें जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कार्लसन का आरोप है कि इसी राजनीतिक परिस्थिति के कारण नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान के साथ युद्ध जारी रहे। ये कार्लसन की राजनीतिक व्याख्याएं और आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लेते हुए दावा किया कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने के पक्ष में हैं। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ कथित तौर पर ईरान के साथ समझौते की संभावना पर जोर दे रहे हैं। कार्लसन ने ट्रंप से सैन्य विकल्प के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है।
परमाणु हमले के संभावित परिणामों को लेकर भी कार्लसन ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका दावा है कि पिकैक्स माउंटेन पर जमीन के भीतर परमाणु विस्फोट होने से रेडियोधर्मी प्रदूषण फैल सकता है और फारस की खाड़ी के जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने लाखों लोगों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई है। हालांकि, इस तरह के किसी संभावित विस्फोट के प्रभाव का वास्तविक आकलन उसके स्थान, गहराई और अन्य वैज्ञानिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल में कहा था कि ईरान के साथ बातचीत ठीक चल रही है और वह जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहते। उन्होंने पिकैक्स माउंटेन का जिक्र करते हुए यह भी कहा था कि कुछ ईरानी परमाणु ठिकानों से निपटना बाकी है। दूसरी ओर, कतर के मध्यस्थों ने ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत की है, जबकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि किसी समझौते पर अभी सहमति नहीं बनी है।
इससे पहले भी अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्रीय सहयोगी देशों को ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों और जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में टकर कार्लसन का परमाणु हमले वाला दावा क्षेत्र में तनाव की गंभीरता को जरूर रेखांकित करता है, लेकिन इसे अमेरिकी सरकार की घोषित सैन्य योजना या तय फैसले के रूप में देखना सही नहीं होगा। फिलहाल कूटनीतिक बातचीत और सैन्य विकल्पों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
