मध्य-पूर्व के प्रमुख देश United Arab Emirates ने प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री Sheikh Mohammed bin Rashid Al Maktoum ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों में देश की 50 प्रतिशत सरकारी सेवाओं, सेक्टर और संचालन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम पर चलाया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत “Agentic AI” नाम की उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो केवल डेटा विश्लेषण ही नहीं बल्कि खुद निर्णय लेने और कार्यों को निष्पादित करने में भी सक्षम होगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह सिस्टम प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज, पारदर्शी और कम लागत वाला बनाए।
सरकार के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं बल्कि पूरी गवर्नेंस प्रणाली का पुनर्गठन है। सभी सरकारी विभागों को AI को अपनाने, प्रक्रियाओं को फिर से डिजाइन करने और स्मार्ट सिस्टम को लागू करने के आधार पर आंका जाएगा। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों को भी AI से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे इस नई व्यवस्था के अनुरूप काम कर सकें।
इस योजना के पीछे UAE की लंबे समय से चल रही डिजिटल रणनीति भी अहम भूमिका निभा रही है। देश पहले ही ई-गवर्नेंस, डिजिटल आईडी और ऑनलाइन सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, जहां हजारों सेवाएं एकीकृत प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम UAE को दुनिया का पहला ऐसा देश बना सकता है, जहां सरकार का बड़ा हिस्सा पूरी तरह AI-ड्रिवन होगा। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि AI आने वाले वर्षों में UAE की नॉन-ऑयल अर्थव्यवस्था में भारी योगदान दे सकता है।
हालांकि, इस तरह के बड़े बदलाव के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। डेटा सुरक्षा, AI की विश्वसनीयता और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दे अहम होंगे। फिर भी UAE सरकार का मानना है कि सही नीति और प्रशिक्षण के जरिए इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।
कुल मिलाकर, UAE का यह कदम दुनिया के लिए एक नया मॉडल पेश करता है, जहां सरकारें पारंपरिक सिस्टम से आगे बढ़कर AI आधारित स्मार्ट गवर्नेंस की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले समय में अन्य देश भी इस मॉडल को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
