
UGC रिपोर्ट 2026: विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें बढ़ीं, नए नियमों पर बवाल
देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव (caste discrimination) की शिकायतों में पिछले पांच वर्षों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की गई है, जो UGC की नवीनतम रिपोर्ट का हिस्सा बताया गया है, ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने के लिए जारी किए गए UGC के नए नियमों पर भी व्यापक बहस जारी है।
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 से 2023-24 के बीच जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में करीब 118 % की वृद्धि देखी गई है, हालांकि UGC का दावा है कि कुल मामलों में लगभग 91 % मामलों का समाधान भी किया गया है, बावजूद इसके लंबित शिकायतों की संख्या में बढ़ोतरी को गंभीर मुद्दा बताया जा रहा है।
UGC ने हाल ही में “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” नाम से नए नियम भी लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा परिसरों में समानता और समावेशन को बढ़ावा देना और जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है, लेकिन इन नियमों को लेकर छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक समूहों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों से व्यवस्थागत बदलाव आ सकता है और कैंपस में समानता की चेतना बढ़ सकती है, वहीं आलोचक इसे व्यवहारिक रूप से लागू करना चुनौतीपूर्ण मानते हैं और कहते हैं कि इससे कागज़ी दायित्व ही बढ़ सकते हैं, न कि असली बदलाव।
इन नए नियमों में हर कॉलेज-विश्वविद्यालय में Equal Opportunity Cells (EOCs) की स्थापना को अनिवार्य करना, भेदभाव के मामलों की शिकायत और समाधान के लिए विस्तृत प्रक्रिया, और अनुपालन की निगरानी के प्रावधान शामिल हैं, हालांकि कुछ आलोचकों का कहना है कि ये नियम एकतरफा या प्रशासनिक बोझ बन सकते हैं, जिससे विवाद और सियासी बहसों को जन्म मिला है।



