Site icon Prsd News

यूपी में वोटर लिस्ट का बड़ा अंतर! पंचायत और विधानसभा की मतदाता सूची में 2.4 करोड़ का फर्क, 2027 चुनाव से पहले शुरू होगी जांच

images 2 3

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। प्रदेश की पंचायत और विधानसभा की मतदाता सूचियों में करीब 2.4 करोड़ मतदाताओं का अंतर बताया जा रहा है। इस गड़बड़ी या अंतर की वजह समझने के लिए निर्वाचन अधिकारियों ने दोनों सूचियों का मिलान कराने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र नागरिकों की पहचान करना है, जिनका नाम पंचायत की मतदाता सूची में तो दर्ज है, लेकिन विधानसभा की वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की विधानसभा मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद करीब 13.39 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जून 2026 में जारी पंचायत की अंतिम मतदाता सूची में लगभग 12.58 करोड़ मतदाता थे। हालांकि, दोनों सूचियों का अंतर केवल इन कुल आंकड़ों की तुलना से नहीं समझा जा सकता, क्योंकि पंचायत और विधानसभा की सूचियां अलग-अलग क्षेत्रों और प्रक्रियाओं के आधार पर तैयार होती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता आंकड़ों में करीब 2.4 करोड़ का अंतर सामने आया है।

इस पूरी प्रक्रिया के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों का पंचायत और शहरी निकायों की वोटर लिस्ट से मिलान किया जाए। यह कवायद विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी Special Summary Revision-2027 का हिस्सा होगी। इस प्रक्रिया में एक जनवरी 2027 को पात्रता की कटऑफ तारीख माना गया है। जिन पात्र लोगों का नाम किसी भी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में नहीं मिलेगा, उन्हें फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए कहा जाएगा।

इस बार मतदाता सूची में महिलाओं और युवाओं के नाम जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, मौजूदा विधानसभा मतदाता सूची में महिलाओं की संख्या अपेक्षा से कम है। इसी वजह से आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आंगनबाड़ी कर्मियों और महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाएगी। ये कर्मचारी घर-घर जाकर ऐसी पात्र महिलाओं की पहचान करेंगे, जिनका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं है। इसके अलावा 18 से 19 साल के नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए स्कूलों और कॉलेजों के इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब की सहायता भी ली जाएगी।

निर्वाचन अधिकारियों को राशन की दुकानों के लाभार्थियों की सूची की जांच करने के लिए भी कहा गया है। इसमें 18 साल या उससे अधिक उम्र के ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, जो राशन कार्ड से जुड़े हैं, लेकिन मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है। शहरी इलाकों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य सामुदायिक संगठनों की मदद से भी पात्र मतदाताओं का पता लगाने की योजना है। इस तरह प्रशासन अलग-अलग सरकारी विभागों और स्थानीय संस्थाओं के जरिए मतदाता सूची को अधिक समावेशी बनाने की कोशिश करेगा।

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम 12 नवंबर 2026 से शुरू होगा। इसी दिन समेकित मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित करने का कार्यक्रम है। इसलिए जिन पात्र नागरिकों का नाम अभी विधानसभा की वोटर लिस्ट में नहीं है, उनके लिए इस अवधि में नाम जुड़वाने का मौका रहेगा।

इसी बीच उत्तर प्रदेश में मतदान केंद्रों का भी पुनर्गठन किया गया है। निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बाद प्रदेश में मतदान केंद्रों की संख्या 1,77,516 से घटकर 1,73,730 रह गई है। यह बदलाव सभी 75 जिलों की 403 विधानसभा सीटों में किया गया है। इसके लिए एक मतदान केंद्र पर लगभग 1,200 मतदाताओं का मानक रखा गया है। बूथ लेवल अधिकारियों को मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र में हुए बदलाव की जानकारी देने और परिवार के सदस्यों के नाम एक ही मतदाता सूची के हिस्से में रखने के लिए जरूरी सुधार कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

इस पूरी कवायद का मकसद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना और छूटे हुए मतदाताओं की पहचान करना है। हालांकि, पंचायत और विधानसभा की सूचियों में सामने आया अंतर अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सभी संबंधित लोग विधानसभा की वोटर लिस्ट से बाहर हैं। दोनों सूचियों का विस्तृत मिलान और सत्यापन होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने नए नाम जोड़े जाने हैं और कितने रिकॉर्ड में सुधार की जरूरत है।

Exit mobile version