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पनामा नहर पर बढ़ी अमेरिका-चीन टकराव

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अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक, Panama Canal, तक पहुंच गई है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह पनामा के झंडे वाले जहाजों को रोककर या देरी कराकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापारिक संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के बंदरगाहों पर पनामा-फ्लैग वाले जहाजों की जांच और हिरासत (detention) के मामलों में अचानक वृद्धि देखी गई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि यह कदम जानबूझकर उठाया गया है, ताकि पनामा पर दबाव बनाया जा सके। Marco Rubio ने इसे “बुलीइंग” यानी दबाव की रणनीति बताते हुए कहा कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन अस्थिर होती है, लागत बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भरोसा कमजोर पड़ता है।

इस विवाद की जड़ पनामा के उस फैसले में है, जिसमें उसने एक हांगकांग आधारित कंपनी को दिए गए पोर्ट संचालन के अधिकार को रद्द कर दिया था। इसके बाद से चीन और पनामा के बीच तनाव बढ़ गया और अब इसका असर जहाजों की आवाजाही पर दिखने लगा है। अमेरिका ने इस फैसले का समर्थन किया है और खुद को पनामा के साथ खड़ा बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Panama Canal सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार की धुरी है, जहां से हर साल हजारों जहाज गुजरते हैं। ऐसे में अगर इस मार्ग से जुड़े जहाजों को रोका या धीमा किया जाता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।

चीन ने हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह सामान्य जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और अमेरिका इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है। वहीं, पनामा ने भी स्थिति को ज्यादा गंभीर न बताते हुए कहा कि यह केवल नियमित निरीक्षण हो सकता है। लेकिन अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगे और गहरा सकता है।

दरअसल, हाल के वर्षों में लैटिन अमेरिका में चीन के बढ़ते निवेश और प्रभाव को लेकर अमेरिका पहले से ही सतर्क रहा है। Donald Trump प्रशासन भी पनामा नहर को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानता है और यहां चीन की मौजूदगी को चुनौती के रूप में देखता है। ऐसे में यह टकराव सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की बड़ी लड़ाई का हिस्सा बनता जा रहा है।

कुल मिलाकर, पनामा नहर को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कूटनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। अगर यह विवाद और बढ़ता है, तो दुनिया भर के व्यापारिक मार्गों और आपूर्ति तंत्र पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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