Site icon Prsd News

ईरान पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिका का बड़ा वार, चीन की रिफाइनरी और ‘शैडो फ्लीट’ पर प्रतिबंध

download 1 25

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा आर्थिक हमला करते हुए चीन की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी और ईरानी तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। Donald Trump प्रशासन के इस फैसले को ईरान की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली तेल आय को कमजोर करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल निर्यात क्षमता को सीमित करने और उसके वैश्विक नेटवर्क को तोड़ने के उद्देश्य से की गई है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी को निशाना बनाया है, जो ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इसके साथ ही लगभग 40 शिपिंग कंपनियों और टैंकरों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिन्हें ईरान के तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माना जाता है। ये जहाज गुप्त तरीके से ईरानी तेल को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाते हैं और इससे तेहरान को अरबों डॉलर की आय होती है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मकसद केवल व्यापारिक गतिविधियों को रोकना नहीं, बल्कि ईरान के सैन्य और परमाणु कार्यक्रमों को आर्थिक रूप से कमजोर करना भी है। ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने कहा कि “आर्थिक सख्ती” के जरिए ईरानी शासन पर वित्तीय दबाव बढ़ाया जा रहा है, जिससे उसकी आक्रामक गतिविधियों को रोका जा सके।

इस कार्रवाई के तहत जिन कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच खत्म कर दी जाती है और उनके साथ किसी भी अमेरिकी नागरिक या संस्था के व्यापार पर रोक लग जाती है। इतना ही नहीं, जो विदेशी कंपनियां इन गतिविधियों में शामिल पाई जाती हैं, उन पर भी द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल ईरान के खिलाफ नहीं, बल्कि चीन पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है। ऐसे में यह कार्रवाई वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर भी असर डाल सकती है।

वहीं, चीन ने इन प्रतिबंधों का विरोध करते हुए इन्हें “अवैध” बताया है और अमेरिका से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इस घटनाक्रम से पहले ही तनावपूर्ण अमेरिका-चीन संबंध और अधिक जटिल हो सकते हैं, खासकर उस समय जब वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

कुल मिलाकर, अमेरिका द्वारा उठाया गया यह कदम ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन पर भी गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

Exit mobile version