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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले ट्रंप का सख्त संदेश

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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय बैठक शुरू होने जा रही है। इस बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को “ईरान के साथ या बिना” खोला जाएगा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल का परिवहन होता है, और इसके बाधित होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

इस्लामाबाद में हो रही यह वार्ता 2026 के ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद बनी नाजुक युद्धविराम स्थिति को स्थायी शांति में बदलने की कोशिश मानी जा रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही इस बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल नियंत्रण, क्षेत्रीय सुरक्षा और सबसे अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।

हालांकि वार्ता से पहले ही दोनों देशों के बीच तनाव साफ दिखाई दे रहा है। ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने युद्धविराम समझौते का पालन नहीं किया और जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने में “बेईमानी” दिखाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी भी जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी कम है और ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और शर्तों के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है।

ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि यह वार्ता असफल रहती है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों को फिर से हथियारों से लैस किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ निर्णायक कदम उठाया जाएगा।

दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह नियंत्रित तरीके से जलडमरूमध्य खोल सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं, जिनमें सुरक्षा निगरानी और आर्थिक नियंत्रण शामिल हैं। इस वजह से दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति बनी हुई है और वार्ता का परिणाम अनिश्चित नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत “मेक या ब्रेक” साबित हो सकती है। अगर समझौता हो जाता है तो न केवल मध्य पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा कदम होगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार भी स्थिर हो सकता है। वहीं, असफलता की स्थिति में युद्ध और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

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